दिल्ली में प्रदर्शन जारी: शिक्षा सुधारों पर बातचीत बेनतीजा, मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष

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AuthorNeha Patil|Published at:
दिल्ली में प्रदर्शन जारी: शिक्षा सुधारों पर बातचीत बेनतीजा, मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष

केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शुक्रवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही। प्रदर्शनकारियों की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। हालांकि, सरकार ने परीक्षा सुधारों और कानूनी मामलों पर आश्वासन दिए हैं, लेकिन जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

Detailed Coverage

बातचीत में आया गतिरोध, मंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को हुई बातचीत बेनतीजा साबित हुई। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन मंत्री को हटाने की मुख्य मांग पर कोई सहमति नहीं बन पाई।

सरकार का रुख और सुरक्षा के इंतजाम

सरकारी सूत्रों का कहना है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की कोई योजना नहीं है और वे पूरी तरह से सत्ताधारी दल के समर्थन में हैं। इस इनकार के बावजूद, केंद्र सरकार ने विरोध के अन्य पहलुओं को संबोधित करने की कोशिश की है। यह आंदोलन परीक्षा की अखंडता और पेपर लीक विवादों को लेकर चिंताओं के बाद शुरू हुआ था। जंतर-मंतर पर पिछले दो महीने से जारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 10 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की हैं।

अन्य मांगों पर प्रगति

विरोध से जुड़े कुछ द्वितीयक मुद्दों पर प्रगति की खबर है। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सरकारी मध्यस्थों से आश्वासन मिलने के बाद अपना 26 दिनों का उपवास समाप्त कर दिया। सरकार ने परीक्षा सुधारों पर चर्चा करने की इच्छा जताई है, विशेष रूप से पेपर लीक से संबंधित चिंताओं को दूर करने पर। इसके अलावा, अधिकारियों ने संसद तक हालिया मार्च में भाग लेने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी मामले न चलाने पर सकारात्मक रुख दिखाया है। NEET पेपर लीक विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए संभावित मुआवजे पर भी चर्चा चल रही है, जो छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन का एक मुख्य कारण रहा है।

प्रधानमंत्री का सुधारों पर जोर

सरकार ने बातचीत में शामिल होने के साथ-साथ, सार्वजनिक संदेशों में मंत्रिस्तरीय जवाबदेही के बजाय प्रणालीगत बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में परीक्षा पेपर लीक मामलों को संभालने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की योजना का खाका पेश किया, और छात्रों और बेरोजगार युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया। हालांकि, इस नीति पर ध्यान केंद्रित करने से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की विशिष्ट मांग पूरी नहीं हुई है। CJP नेताओं ने इस मांग को 'गैर-परक्राम्य' करार दिया है और अपने आंदोलन को और बढ़ाने की चेतावनी दी है।

निवेशक और पर्यवेक्षक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या परीक्षा की अखंडता के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित सुधार और फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा स्थिति को स्थिर कर सकता है, या यदि जारी विरोध प्रदर्शन राजधानी में और अधिक सामाजिक और सुरक्षा व्यवधान पैदा करेगा। विकास के अगले चरण की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार वादा किए गए शिक्षा सुधारों के लिए अधिक ठोस समय-सीमा प्रदान करती है या यदि वार्ता विफल होने के बाद प्रदर्शनकारी अपनी कार्रवाई तेज करने का निर्णय लेते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.