IT Stocks में 'रिवर्स आर्बिट्राज' का खेल: Wipro, Infosys पर पैसा बना रहे ट्रेडर्स!

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AuthorNeha Patil|Published at:
IT Stocks में 'रिवर्स आर्बिट्राज' का खेल: Wipro, Infosys पर पैसा बना रहे ट्रेडर्स!

एक्सपर्ट ट्रेडर्स NSE के स्टॉक लेंडिंग मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके Wipro और Infosys जैसे बड़े IT स्टॉक्स में 'रिवर्स आर्बिट्राज' से मुनाफा कमा रहे हैं। यह स्ट्रेटेजी फ्यूचर ट्रेडिंग के डिस्काउंट को कैश प्राइस पर भुनाने का तरीका है। ध्यान दें, यह सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन की वजह से है, कंपनियों की फंडामेंटल हेल्थ में कोई बदलाव नहीं है।

कैसे काम कर रही है ये 'रिवर्स आर्बिट्राज' स्ट्रेटेजी?

कुछ खास तरह के ट्रेडर्स नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के स्टॉक लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) का फायदा उठाकर 'रिवर्स आर्बिट्राज' स्ट्रेटेजी पर दांव लगा रहे हैं। यह चाल खासतौर पर Wipro, Infosys, HCL Technologies और Tata Consultancy Services जैसी बड़ी IT कंपनियों को टारगेट कर रही है। इस स्ट्रेटेजी में, ट्रेडर स्टॉक के फ्यूचर प्राइस और कैश मार्केट प्राइस के बीच के अंतर का फायदा उठाते हैं, जहां फ्यूचर प्राइस, स्पॉट प्राइस से कम होता है।

क्यों मिल रहा है यह मौका?

आम तौर पर, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमत स्पॉट प्राइस से थोड़ी ज्यादा होती है क्योंकि इसमें फ्यूचर में पोजीशन कैरी करने की लागत शामिल होती है। लेकिन पिछले 15 महीनों से IT सेक्टर का प्रदर्शन Nifty इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा है। AI डेवलपमेंट में लगी ग्लोबल टेक कंपनियों की ओर पूंजी का झुकाव इस ट्रेंड का एक कारण माना जा रहा है, जिसने IT शेयरों पर दबाव बनाया है।

जब फ्यूचर प्राइस स्पॉट प्राइस से नीचे ट्रेड करता है, तो ट्रेडर्स कैश मार्केट में स्टॉक बेच देते हैं और साथ ही सस्ते फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को खरीद लेते हैं। शेयर उधार लेकर इस कैश सेल को पूरा किया जाता है, जिससे वे प्राइस डिफरेंस को लॉक कर लेते हैं। जैसे-जैसे कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी के करीब आता है, स्पॉट और फ्यूचर प्राइस लगभग एक हो जाते हैं। ऐसे में, उधार की लागत और टैक्स चुकाने के बाद ट्रेडर को मुनाफा मिल जाता है।

कितना हो रहा है वॉल्यूम?

SLBM डेटा के अनुसार, जून के महीने में Wipro के 12.24 करोड़ (122.43 million) से ज्यादा शेयर उधार लिए गए, जो सबसे ज्यादा था। Infosys के 2.91 करोड़ (29.15 million), HCLTech के 1.50 करोड़ (15.06 million) और TCS के 53 लाख (5.34 million) से ज्यादा शेयर भी उधार लिए गए। इन चारों कंपनियों के शेयर कुल 32.99 करोड़ (329.97 million) शेयर्स का आधे से ज्यादा हिस्सा थे जो इस प्लेटफॉर्म से उधार लिए गए।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

छोटे निवेशकों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह टेक्निकल ट्रेडिंग एक्टिविटी कंपनी के फंडामेंटल परफॉर्मेंस से अलग है। यह स्ट्रेटेजी मार्केट के मैकेनिक्स और सेक्टर के प्राइसिंग प्रेशर पर आधारित है, न कि कंपनी के रेवेन्यू, प्रॉफिट मार्जिन या कर्ज में किसी बदलाव के कारण। चूंकि ये ट्रेड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर सेटल होते हैं, इसलिए लंबे समय में शेयरधारक वैल्यू पर इनका असर आमतौर पर सीमित रहता है।

निवेशक इन IT शेयरों के स्पॉट और फ्यूचर प्राइस के बीच के गैप पर नजर रख सकते हैं। अगर सेक्टर का प्रदर्शन बाजार के मुकाबले बदलने लगता है या शेयर उधार लेने की लागत काफी बढ़ जाती है, तो इस 'रिवर्स आर्बिट्राज' स्ट्रेटेजी से होने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है। इस ट्रेंड की स्थिरता AI निवेशों पर ग्लोबल सेंटिमेंट और आने वाली तिमाहियों में घरेलू IT सेक्टर के प्रदर्शन से जुड़ी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.