बिहार की बैंकिपुर सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनावी मैदान में शानदार शुरुआत की है। गिनती के चार राउंड के बाद, किशोर **1,145** वोटों से आगे चल रहे हैं। यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है, जिस पर उनका कब्जा **1995** से है।
चुनावी मैदान में प्रशांत किशोर की दमदार दस्तक!
बिहार की राजनीति में आज उस वक्त हलचल मच गई जब जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बैंकिपुर विधानसभा सीट से चुनावी डेब्यू किया। वोटों की गिनती के शुरुआती चार राउंड के बाद, प्रशांत किशोर ने 6,269 वोट हासिल कर 1,145 वोटों की बढ़त बना ली है। उनके मुकाबले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 5,124 वोट मिले हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 884 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर चल रही हैं।
3 दशक से BJP का गढ़, क्या बदलेगा समीकरण?
बैंकिपुर विधानसभा सीट, जिसे पहले पटना वेस्ट के नाम से जाना जाता था, पिछले तीन दशकों से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है। यह सीट बीजेपी नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई थी। इस उपचुनाव में कुल 26 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, और वोटों की गिनती पटना के एएन कॉलेज में 31 राउंड में कड़ी सुरक्षा के बीच की जा रही है।
कम वोटिंग प्रतिशत ने बढ़ाई चिंता
इस चुनाव की एक अहम बात वोटरों की भागीदारी रही। 30 जुलाई को हुए उपचुनाव में करीब 34% वोट पड़े, जो कि 2025 के विधानसभा चुनावों में दर्ज 41.45% वोटिंग से काफी कम है। जानकारों का मानना है कि कम वोटिंग प्रतिशत राजनीतिक विश्लेषकों के लिएCampaign की तीव्रता का आकलन करने का एक अहम पैमाना होता है।
मतगणना से पहले गरमाया माहौल
वोटों की गिनती शुरू होने से पहले, प्रशांत किशोर ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। रविवार देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशोर ने दावा किया था कि उनके Campaign कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया और वोटरों को डराने-धमकाने की कोशिशें हुईं। उन्होंने पटना के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस से मिले कागजात का हवाला देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी इस मामले को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
नतीजों पर सबकी नजर
फिलहाल, बाकी बचे 27 राउंड की गिनती के बाद ही अंतिम नतीजे सामने आएंगे। अगर इस सीट पर समीकरण बदलते हैं, तो यह एक बड़ी राजनीतिक घटना होगी, खासकर तब जब बीजेपी 1995 से इस सीट पर काबिज है।
