अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों और कीमती धातुओं की चोरी के मामले में पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। जांच में सामने आया है कि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर चंदे की रकम को ठिकाने लगाया गया और उससे रियल एस्टेट में निवेश किया गया।
चोरी का खेल और सुरक्षा में चूक
पुलिस जांच के अनुसार, यह घोटाला मंदिर के डोनेशन काउंटिंग रूम में हुआ। मुख्य आरोपी और काउंटिंग-रूम सुपरवाइजर सुभाष श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा जांच (frisking) जैसे अनिवार्य प्रोटोकॉल को पूरी तरह नजरअंदाज किया। इसी चूक का फायदा उठाकर स्टाफ ने लंबे समय तक गुप्त तरीके से दान की राशि और गहने बाहर निकाले। पुलिस ने सबूत के तौर पर 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के मोबाइल चैट रिकॉर्ड अदालत में पेश किए हैं।
बरामदगी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
पुलिस ने अब तक लगभग ₹79.85 लाख की नकदी बरामद की है, साथ ही विदेशी मुद्रा और जेवर भी जब्त किए गए हैं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि चोरी की गई रकम को रियल एस्टेट और गाड़ियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया। फाइलों के मुताबिक, एक आरोपी के रिश्तेदार के नाम पर ₹55 लाख की रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी भी खरीदी गई थी। हालांकि, आरोपी पक्ष की ओर से अब इन संपत्तियों और चोरी के पैसों के बीच सीधा संबंध होने की बात को चुनौती दी जा सकती है।
कानूनी कार्रवाई और आरोपी
19 सितंबर को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। चार्जशीट में अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव का नाम शामिल है। अब अदालत सीसीटीवी रिकॉर्ड्स और गवाहों के बयानों के आधार पर तय करेगी कि आगे की सुनवाई किस दिशा में बढ़ेगी।
