US Department of Defense ने 'Cyber Mastery Incentive Pay' (C-MIP) प्रोग्राम शुरू किया है। इसमें टॉप-लेवल साइबर एक्सपर्ट्स को ज्यादा सैलरी मिलेगी, जबकि एंट्री-लेवल कर्मचारियों के भत्तों में कटौती की गई है। यह कदम दुनिया भर में बढ़ती साइबर एक्सपर्ट्स की कमी और बढ़ते लेबर कॉस्ट की ओर इशारा करता है।
क्या है नया पे-स्ट्रक्चर?
1 अक्टूबर, 2026 से लागू हुए इस प्रोग्राम का मुख्य मकसद 'CyberCom 2.0' स्ट्रेटेजी के तहत डिजिटल वॉरफेयर में माहिर लोगों को रोकना है। पुराने सीनियरिटी-बेस्ड सिस्टम को छोड़कर, अब यह पूरी तरह से स्किल और टेक्निकल प्रोफिशिएंसी पर आधारित है।
कमाई और विवाद (Pay Incentives & Friction)
नए नियमों के मुताबिक, 'मास्टर्स-लेवल' के ऑपरेटर्स को हर महीने $3,500 तक का इंक्रीमेंट मिल सकता है। वहीं, बेसिक-लेवल के साइबर स्टाफ के इंसेंटिव में $1,000 तक की कटौती की गई है। सरकार का तर्क है कि मॉडर्न साइबर थ्रेट्स और AI के दौर में एक्सपर्ट्स को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। हालांकि, एंट्री-लेवल के बीच मची खलबली को देखते हुए Army ने 1 साल का ग्रेस पीरियड दिया है ताकि वे सर्टिफिकेशन हासिल कर सकें।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह कदम ग्लोबल 'टैलेंट वॉर' को दर्शाता है। जब सरकारी एजेंसियां एक्सपर्ट्स के लिए वेतन बढ़ाती हैं, तो प्राइवेट सेक्टर के डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स और IT कंपनियों पर भी अपने कर्मचारियों को रोकने के लिए सैलरी बढ़ाने का दबाव बढ़ जाता है। भविष्य में टेक कंपनियों के मार्जिन पर इस लेबर कॉस्ट का असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों को डिफेंस और IT सेक्टर की कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे इस बढ़ती हुई सैलरी लागत और टैलेंट रिटेंशन की चुनौती को संभाल रहे हैं।
