U.S. Department of Defense का डेटाबेस हैक होने से **31 लाख** मिलिट्री कर्मियों की जानकारी खतरे में है। इस बड़ी सेंध के बाद अब दुनिया भर में साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर भारतीय IT सेक्टर पर पड़ सकता है।
डेटा में बड़ी सेंध
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (U.S. Department of Defense) के 'डिफेंस मैनपावर डेटा सेंटर' में हुए एक बड़े साइबर हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच हुए इस हमले में करीब 31 लाख सैन्य कर्मियों और पूर्व सैनिकों का निजी डेटा चोरी हुआ है। हैकर्स ने एक अनएन्क्रिप्टेड फाइल-शेयरिंग सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाते हुए सोशल सिक्योरिटी नंबर और सर्विस रिकॉर्ड्स तक पहुंच बना ली।
क्यों बढ़ेगा IT कंपनियों का काम?
हाल ही में FBI में हुई हैकिंग और अब पेंटागन की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी एजेंसियों के लिए पुराने डेटाबेस को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। अब दुनिया भर की सरकारें 'साइबर डिफेंस' को अपनी प्राथमिकता बना रही हैं। भारत की बड़ी IT एक्सपोर्टर कंपनियां पहले से ही ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती हैं। ऐसे में 'थ्रेट डिटेक्शन', 'आइडेंटिटी मैनेजमेंट' और 'डेटा एन्क्रिप्शन' जैसे वर्टिकल्स में डिमांड बढ़ना तय है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मौका तो बड़ा है, लेकिन रिस्क भी कम नहीं है। अब क्लाइंट्स ऐसी सिक्योरिटी सर्विसेज की मांग कर रहे हैं जिनमें चूक की कोई गुंजाइश न हो। अगर किसी IT कंपनी का सिस्टम भी इस तरह के हमलों की चपेट में आता है, तो उन्हें भारी कानूनी जुर्माना और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स हाथ से गंवाने का डर भी होगा। निवेशकों को सलाह है कि वे प्रमुख IT कंपनियों के नतीजों (Earnings) के दौरान साइबर सिक्योरिटी रेवेन्यू पर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि यही भविष्य में कमाई का मुख्य इंजन बनेगा।
