संसदीय समिति की एक नई रिपोर्ट भारत की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं NCERT और CBSE में कर्मचारियों की भारी कमी को लेकर चेतावनी दे रही है। NCERT में **1,500** से अधिक पद खाली हैं, जबकि CBSE में **44%** की कमी है, जिससे राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
संसदीय समिति ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) में कर्मचारियों की भारी कमी को लेकर चेतावनी जारी की है। ये दोनों संस्थाएं भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं, और स्थायी कर्मचारियों की कमी को देखते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
अनुमान समिति (Committee on Estimates) ने बताया कि NCERT में 1,596 पद खाली हैं, जो कि इसके कुल स्वीकृत शक्ति का आधे से अधिक है। इसी तरह, CBSE को 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 रिक्तियों से जूझना पड़ रहा है। यह कमी अकादमिक, शिक्षण और प्रशासनिक सहायता सहित संगठनों के विभिन्न स्तरों पर फैली हुई है।
समिति ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर भारी निर्भरता परिचालन जोखिम पैदा करती है। चिंता यह है कि स्थायी कर्मचारियों पर निर्भर न रहने से लाखों छात्रों द्वारा सालाना दी जाने वाली बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा, अखंडता और गुणवत्ता खतरे में पड़ सकती है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि महत्वपूर्ण परीक्षा कार्यों के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता बंद की जानी चाहिए।
इन आंतरिक संसाधन बाधाओं के बावजूद, CBSE का प्रशासनिक बोझ काफी बढ़ गया है। बोर्ड से संबद्ध स्कूलों की संख्या 1990 के दशक की शुरुआत में 3,787 से बढ़कर 2025 के अंत तक 31,000 से अधिक हो गई है। लाखों छात्र सालाना कक्षा X और XII की परीक्षाओं के लिए नामांकित होते हैं, ऐसे में पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों के बिना इस पैमाने का प्रबंधन एक चुनौती बनी हुई है।
चूंकि NCERT और CBSE सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियां न होकर स्वायत्त सरकारी निकाय हैं, इसलिए शेयर बाजार पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता है। हालांकि, इन संस्थानों की परिचालन क्षमता व्यापक शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक है। संसदीय समिति ने रिक्त पदों को भरने और संगठनों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध, तेज गति वाली भर्ती प्रक्रिया की सिफारिश की है, ताकि वे राष्ट्रीय शिक्षा ढांचे का समर्थन जारी रख सकें।
