Palghar: जान जोखिम में डाल ट्रैक पार करते हैं गाँव वाले, विकास की रफ्तार पर सवाल!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Palghar: जान जोखिम में डाल ट्रैक पार करते हैं गाँव वाले, विकास की रफ्तार पर सवाल!

पालघर, महाराष्ट्र के वाधिव गांव के छात्रों और निवासियों को स्कूल और ज़रूरी सेवाओं तक पहुँचने के लिए रोज़ाना जान जोखिम में डालकर सक्रिय रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। सड़क संपर्क की कमी के चलते यह स्थिति बनी हुई है। क्षेत्र में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं के बीच यह बुनियादी ढांचा गैप समुदाय के गुस्से को बढ़ा रहा है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन और चुनाव बहिष्कार की धमकी दी जा रही है।

वाधिव गांव का खतरनाक सफर

महाराष्ट्र के पालघर जिले में वाधिव गांव के निवासी और छात्र हर दिन एक जानलेवा संकट का सामना कर रहे हैं। सफाले और विरार स्टेशनों के बीच स्थित इस गांव में आवागमन के लिए कोई सुरक्षित सड़क या पुल नहीं है, जिसके कारण लोगों को सक्रिय रेलवे ट्रैक को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह खतरनाक स्थिति तब से बनी हुई है जबसे इस क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है।

हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस मुद्दे को सबके सामने लाया है, जिसमें छात्र ट्रैक पार करते हुए दिख रहे हैं। माता-पिता के अनुसार, यह यात्रा उनके लिए लगातार चिंता का सबब बनी रहती है। सड़क संपर्क की कमी के चलते यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी के लिए भी गंभीर मुश्किलें खड़ी करती है। ग्रामीणों ने बताया है कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी जुगाड़ के सहारे ट्रैक पार कराना पड़ता है, जिससे अस्पताल पहुंचने में काफी देरी हो जाती है।

विकास के बीच बुनियादी सुविधाओं का अभाव

यह बदहाली पालघर क्षेत्र में चल रही विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बिल्कुल विपरीत है। 'चौथी मुंबई' के रूप में जाने जाने वाले इस क्षेत्र में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन और मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में, 4,000 से अधिक की आबादी वाले गांव के लिए एक साधारण और सुरक्षित रास्ता मुहैया कराने में सरकार की विफलता ने निवासियों में गहरी निराशा पैदा कर दी है।

ग्रामीणों की मांग और राजनीतिक दबाव

ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि स्थानीय नेताओं ने सिर्फ झूठे वादे किए हैं और कोई ठोस समाधान नहीं निकाला है। समुदाय ने अब चेतावनी दी है कि जब तक सरकार पैदल चलने वालों और आपातकालीन वाहनों के लिए एक स्थायी सड़क या सुरक्षित ओवरपास का निर्माण शुरू नहीं करती, तब तक वे आगामी चुनावों का बहिष्कार कर सकते हैं।

स्थानीय अधिकारियों पर जमीनी स्तर की संपर्क कमी को दूर करने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि राजनीतिक हस्तियों का कहना है कि इस मुद्दे को संबंधित विभागों के सामने उठाया गया है, लेकिन ग्रामीण अभी भी विकास की समय-सीमा का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान तब तक नहीं होगा जब तक कि परियोजना की मंजूरी, बजट आवंटन और निर्माण की निश्चित समय-सीमा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की जाती।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.