प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की नेशनल सिक्योरिटी पर जीरो-टॉलरेंस नीति दोहराई है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर इस जोर से डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनियों के लिए लंबी अवधि के ग्रोथ रास्ते खुल रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा पर दिए गए हालिया बयान, जिसमें उन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र किया, एक बड़े रणनीतिक बदलाव को दर्शाते हैं। यह नीतिगत रुख सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार के डिफेंस और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित करता है।
डिफेंस स्पेंडिंग और 'आत्मनिर्भर भारत'
सरकार का सुरक्षा के प्रति सख्त रवैया रक्षा बजट आवंटन का मुख्य आधार है। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने का सीधा फायदा HAL, BEL, BDL और Mazagon Dock Shipbuilders जैसी सरकारी कंपनियों को मिल रहा है। इन कंपनियों के ऑर्डर बुक का साइज इस बात का प्रमाण है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को कितना बढ़ावा दिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए जरूरी मॉनिटरिंग पॉइंट्स
निवेशकों को केवल सरकारी ऑर्डर के उत्साह में नहीं बहना चाहिए। डिफेंस सेक्टर में निवेश के दौरान कुछ बातों पर नजर रखना जरूरी है:
- एग्जीक्यूशन क्षमता: रक्षा परियोजनाएं काफी महंगी और लंबी अवधि (Gestation period) वाली होती हैं। कंपनियों के लिए चुनौती बिना किसी कॉस्ट ओवररन के समय पर डिलीवरी देने की है।
- वैल्यूएशन का गणित: हाल के वर्षों में डिफेंस स्टॉक्स की जबरदस्त री-रेटिंग हुई है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि क्या मौजूदा P/E मल्टीपल भविष्य की कमाई (Earnings growth) को सही साबित कर पाते हैं या नहीं।
- रेवेन्यू कंसंट्रेशन: इन कंपनियों की कमाई मुख्य रूप से रक्षा मंत्रालय के बजट और प्रोक्योरमेंट साइकिल पर टिकी होती है। किसी भी नीतिगत बदलाव का सीधा असर इनके मार्जिन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंपनियां घरेलू ऑर्डर्स के साथ-साथ एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी पैठ बना रही हैं, वे भविष्य में ज्यादा स्थिर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसलिए, तिमाही नतीजों में एक्सपोर्ट ऑर्डर्स और घरेलू कॉन्ट्रैक्ट्स की डिलीवरी प्रोग्रेस पर बारीकी से नजर रखना जरूरी है।
