PM CARES Fund ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए **₹8,452 करोड़** का corpus दिखाया है। इसमें से **93%** पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में है। साल भर में **₹475 करोड़** का ब्याज मिला, जो कि कुल डोनेशन के लगभग बराबर है। वहीं, खर्च सिर्फ **₹87.85 लाख** रहा। ऑडिट में देरी और वित्तीय खुलासे में कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
PM CARES Fund का पूरा हिसाब-किताब
सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान संसाधनों के प्रबंधन के लिए स्थापित एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, PM CARES Fund ने 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए अपनी ऑडिट रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, फंड का कुल corpus ₹8,452 करोड़ रहा। इस पूंजी का एक बड़ा हिस्सा, ₹7,846.65 करोड़, यानी लगभग 93% पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा गया है। बाकी बची राशि शेड्यूल्ड बैंक खातों में जमा है।
दान से ज्यादा ब्याज की कमाई
फंड का वित्तीय ढांचा यह दर्शाता है कि यह सक्रिय रूप से पैसा लगाने के बजाय ब्याज की कमाई पर अधिक निर्भर है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, ट्रस्ट ने अपने डिपॉजिट से ₹475 करोड़ का ब्याज अर्जित किया। यह आंकड़ा इसी अवधि में प्राप्त ₹480 करोड़ के नए डोनेशन के लगभग बराबर है। इससे पता चलता है कि फंड फिलहाल एक एंडोमेंट (endowment) की तरह काम कर रहा है, जहां ब्याज से होने वाली कमाई पूंजी प्रवाह (capital inflows) का एक बड़ा हिस्सा कवर कर रही है।
खर्च बेहद सीमित
साल भर फंड का उपयोग भी काफी सीमित रहा। कुल खर्च ₹87.85 लाख दर्ज किया गया, जिसमें से ₹87.84 लाख 'PM CARES for Children Scheme' के लिए आवंटित किए गए। छोटी-मोटी बैंक और सर्विस फीस पर बाकी मामूली खर्च हुआ। जानकारों का मानना है कि कुल corpus की तुलना में खर्च का यह स्तर बहुत कम है, जिससे फंड के घोषित उद्देश्यों के लिए धन की तैनाती की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
ऑडिट रिपोर्ट पर अगस्त 2026 में हस्ताक्षर किए गए थे, और यह वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक साल से भी अधिक समय बाद जारी की गई। इस देरी ने डिस्क्लोजर (disclosure) मानकों को लेकर आलोचना को जन्म दिया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कुछ ऐसे स्पष्टीकरण नोट (explanatory notes) गायब हैं जो आमतौर पर ऑडिट की गई वित्तीय विवरणों के साथ संलग्न होते हैं। दस्तावेज़ में एक यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) भी नहीं दिख रहा है, जिसका उपयोग आमतौर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट वित्तीय फाइलिंग की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए करते हैं।
एक और ध्यान देने योग्य बात यह है कि वित्तीय विवरण में कार्यान्वयन एजेंसियों से ₹324.66 करोड़ की वापसी (refunds) की रिपोर्ट है। यह राशि पिछले वर्ष के ₹84.31 करोड़ के रिफंड आंकड़े से काफी अधिक है। इन रिफंड्स के बड़े आकार को देखते हुए, सार्वजनिक दस्तावेज़ में इस पैसे के स्रोत या इसे वापस क्यों किया गया, इसके बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण का अभाव है। यह फंड ऐतिहासिक रूप से नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे से बाहर रहा है, क्योंकि इसे स्वैच्छिक योगदान द्वारा वित्त पोषित एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
