NPS फंड मैनेजर्स के लिए PFRDA का बड़ा फैसला: अब कभी भी कर सकेंगे अप्लाई!

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AuthorAditya Rao|Published at:
NPS फंड मैनेजर्स के लिए PFRDA का बड़ा फैसला: अब कभी भी कर सकेंगे अप्लाई!

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फंड मैनेजर्स के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को 'ऑन-टैप' यानी साल भर खुला रखने का ऐलान किया है। पहले यह रजिस्ट्रेशन कुछ तय समय-सीमा में ही होता था।

Detailed Coverage

अब फंड मैनेजर्स के लिए साल भर खुला रहेगा रजिस्ट्रेशन

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एसेट्स को मैनेज करने में दिलचस्पी रखने वाली संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को 'ऑन-टैप' यानी लगातार चालू रखने का फैसला किया है। पहले की तरह रजिस्ट्रेशन के लिए तय समय-सीमा (जैसे मई 2022 में खुला विंडो) का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे योग्य फाइनेंशियल संस्थानों को पेंशन मैनेजमेंट स्पेस में आने के लिए ज्यादा फ्लेक्सिबल माहौल मिलेगा।

कड़े होंगे नए नियम: अनुभव और कैपिटल का कड़ा इम्तिहान

रिटायरमेंट सेविंग्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, PFRDA ने नए प्रवेशकों के लिए कुछ सख्त शर्तें रखी हैं। संस्थाओं को कम से कम 5 साल का इक्विटी और डेट पोर्टफोलियो मैनेज करने का अनुभव दिखाना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल उन्हीं फर्मों को NPS कॉर्पस सौंपा जाए, जिनका मार्केट की अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो। साथ ही, आवेदन करने वाली फर्म्स को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) या इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) जैसे प्रमुख नियामकों की निगरानी में काम करना होगा।

वित्तीय स्थिरता भी ज़रूरी

नई व्यवस्था में वित्तीय मजबूती एक अहम पैमाना है। PFRDA के अनुसार, आवेदन करने वाली संस्थाओं का पिछले 5 फाइनेंशियल इयर्स में नेट वर्थ कम से कम ₹50 करोड़ रहा हो। इसके अलावा, आवेदन के समय फर्म का पेड-अप कैपिटल कम से कम ₹25 करोड़ होना चाहिए। इन पैमानों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फर्म्स के पास बड़े पेंशन एसेट्स को बिना किसी बड़े जोखिम के संभालने के लिए पर्याप्त वित्तीय आधार हो।

पेंशन सेक्टर के लिए स्ट्रेटेजिक बदलाव

यह कदम पेंशन फंड मैनेजमेंट सेक्टर को और प्रोफेशनल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। लगातार रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिलने से फंड मैनेजर्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे NPS सब्सक्राइबर्स के लिए मैनेजमेंट फीस कम हो सकती है और सेवाओं में सुधार हो सकता है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि हालांकि यह कदम नए प्लेयर्स के लिए NPS कॉर्पस में हिस्सेदारी की दौड़ में शामिल होने का रास्ता खोलता है, लेकिन कड़े नियम यह भी दर्शाते हैं कि रेगुलेटर इस सेक्टर में आने वाली फर्म्स की क्वालिटी और स्थिरता को लेकर सतर्क है। सेक्टर पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी नई संस्थाएं इन उच्च मानकों को पूरा करती हैं और मौजूदा मैनेजर्स बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.