जुलाई 2026 में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग में गजब की तेजी देखने को मिली है। महीने-दर-महीने **85%** की उछाल के साथ कुल निवेश **$3 अरब** तक पहुंच गया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, साल की कुल फंडिंग पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन शुरुआती स्टेज (Early-stage) के बड़े डील्स पर फोकस बढ़ा है।
जुलाई 2026: PE-VC फंडिंग में जोरदार रिकवरी
भारतीय बाजार में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग ने जुलाई 2026 में एक मजबूत वापसी की है। इस महीने कुल 94 डील्स में $3 अरब का निवेश दर्ज किया गया, जो जून 2026 के $1.63 अरब के मुकाबले 85% की बड़ी बढ़ोतरी है। इस उछाल का मुख्य श्रेय इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स को जाता है, जहाँ संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने जमकर पैसा लगाया है।
साल-दर-साल तस्वीर थोड़ी अलग
हालांकि, मासिक आंकड़ों में रिकवरी दिख रही है, लेकिन साल की कुल तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है। जुलाई 2026 में कुल निवेश, जुलाई 2025 के $3.2 अरब के मुकाबले 6% कम रहा। वहीं, जनवरी से जुलाई 2026 तक, कुल 756 डील्स के जरिए $20.3 अरब का निवेश हुआ, जबकि 2025 की समान अवधि में 787 डील्स के साथ $21.5 अरब का निवेश जुटाया गया था।
डील स्टेज में बड़ा बदलाव
निवेशकों के फोकस में भी बदलाव आया है। शुरुआती स्टेज (Early-stage) की फंडिंग में तेजी देखी गई है। जुलाई 2026 में ऐसे डील्स का कुल मूल्य बढ़कर $263 मिलियन हो गया, जो पिछले साल जुलाई में $187 मिलियन था। इतना ही नहीं, शुरुआती स्टेज डील्स का औसत आकार भी लगभग दोगुना होकर $7 मिलियन (पिछले साल $4 मिलियन) हो गया। ग्रोथ स्टेज डील्स में भी औसत टिकट साइज $10 मिलियन से बढ़कर $19 मिलियन हो गया।
इसके विपरीत, लेट-स्टेज (Late-stage) की फंडिंग में गिरावट आई है। जुलाई 2026 में लेट-स्टेज डील्स का कुल मूल्य घटकर $480 मिलियन रह गया, जबकि पिछले साल यह $795 मिलियन था। इस कैटेगरी में औसत डील साइज भी $38 मिलियन से घटकर $27 मिलियन हो गया। इससे पता चलता है कि नए या बढ़ते व्यवसायों में निवेश की भूख तो है, लेकिन बड़ी और स्थापित कंपनियों के लिए फंड जुटाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
निवेशकों के लिए खास बातें
बाजार के प्रतिभागियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में निवेश के ट्रेंड पर नजर रखनी चाहिए। इन सेक्टर्स का प्रदर्शन सरकारी नीतियों, प्रोजेक्ट्स के अमल और ब्याज दरों पर निर्भर करता है। यह देखना अहम होगा कि क्या शुरुआती और ग्रोथ स्टेज की फंडिंग का यह मोमेंटम आगे भी जारी रहता है, क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। साथ ही, यह भी ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मासिक डील्स में आई यह रिकवरी 2026 की दूसरी छमाही में साल-दर-साल ग्रोथ की ओर ले जाती है।
