अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपने नए CEO के पद के लिए **1,000** से ज़्यादा आवेदन मिले हैं। इस महत्वपूर्ण पद के लिए **18 जुलाई** तक आवेदन मांगे गए थे, और अब एक हाई-लेवल कमेटी चयन प्रक्रिया को संभाल रही है।
CEO पद के लिए लगी लंबी कतार!
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, और नतीजा यह है कि इस पद के लिए 1,000 से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। आवेदनों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए, ट्रस्ट को उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और उनकी योग्यताओं की जांच जैसे प्रशासनिक कार्यों को संभालने के लिए एक विशेष सचिव नियुक्त करना पड़ा है।
क्या हैं योग्यताएं और चयन प्रक्रिया?
ट्रस्ट ने इस पद के लिए कुछ खास मानदंड तय किए हैं। उम्मीदवार की उम्र 50 से 70 साल के बीच होनी चाहिए और उनके पास कम से कम 20 साल का प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए। एक अहम शर्त यह भी है कि चुने गए व्यक्ति को अयोध्या में ही रहना होगा, ताकि मंदिर परिसर का प्रबंधन सीधे तौर पर संभव हो सके। इसके अलावा, उम्मीदवार को एक श्रद्धालु हिंदू होना चाहिए, जिसमें धर्म के प्रति गहरी निष्ठा हो, और उन्हें हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं का अच्छा ज्ञान भी होना चाहिए।
इस चयन प्रक्रिया के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें कानून, रक्षा और मंदिर प्रशासन के विशेषज्ञ शामिल हैं। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के चेयरमैन सुरेश हावरे जैसे गणमान्य व्यक्ति शामिल हैं। यह उनके जुड़ाव से ही पता चलता है कि ट्रस्ट एक पारदर्शी और सुनियोजित प्रक्रिया के माध्यम से इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद के लिए नियुक्ति करना चाहता है।
ट्रस्ट के अगले कदम
18 जुलाई की आवेदन की अंतिम तिथि के बाद, यह समिति 19 जुलाई को आवेदनों की औपचारिक समीक्षा शुरू करेगी। इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जहाँ उनकी क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट के जटिल संचालन और प्रबंधन के लिए नए CEO की भूमिका बहुत अहम होगी। इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट 22 जुलाई को होने वाली बोर्ड मीटिंग में पेश की जाएगी।
