Orissa Minerals Development: ऑडिटर की 'रेड फ्लैग' रिपोर्ट! माइनिंग ठप, ज़मीन पर अतिक्रमण, कंपनी पर बड़ा संकट?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Orissa Minerals Development: ऑडिटर की 'रेड फ्लैग' रिपोर्ट! माइनिंग ठप, ज़मीन पर अतिक्रमण, कंपनी पर बड़ा संकट?
Overview

Orissa Minerals Development Company Ltd. (OMDC) के बोर्ड की **11 फरवरी, 2026** को हुई बैठक में **31 दिसंबर, 2025** को समाप्त तिमाही के अनऑडिटेड नतीजों पर चर्चा हुई। हालांकि, नतीजों के बजाय ऑडिटर की रिपोर्ट ने कंपनी की संचालन (Operations) और ज़मीन के मालिकाना हक (Land Holdings) को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

🚩 ऑडिटर ने किन बातों पर उठाया सवाल?

ऑडिटर SDR & Associates की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कंपनी की Belkundi और Bhadrasahi खदानों में माइनिंग ऑपरेशन्स रुकी हुई हैं। इसकी मुख्य वजह लीज रिन्यूअल के लिए जरूरी सरकारी अनुमतियां (Statutory Clearances) न मिलना बताई गई है। हालांकि, Bagiaburu Iron Mines में 14 दिसंबर, 2023 से काम फिर से शुरू हो गया था, लेकिन बाकी मुख्य खदानों की गतिविधि अभी भी ठप है।

🏞️ ज़मीन के मालिकाना हक और अतिक्रमण का सच

कंपनी की ज़मीन के मालिकाना हक का मामला भी बेहद पेचीदा नजर आ रहा है। OMDC ने कुल 284.17 एकड़ ज़मीन का खुलासा किया है, लेकिन इनमें से सिर्फ 61.795 एकड़ ज़मीन ही कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। इस रजिस्टर्ड ज़मीन में से भी 0.350 एकड़ पर अतिक्रमण (Encroachment) हो चुका है।

और भी चौंकाने वाली बात यह है कि बाकी बची 222.375 एकड़ ज़मीन कंपनी के नाम पर है ही नहीं। यह ज़मीन BIRD AND COMPANY और BPME LTD. जैसे तीसरे पक्ष (Third-party) के नाम पर दर्ज है। इस गैर-रजिस्टर्ड ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा, यानी 41.416 एकड़, अतिक्रमण का शिकार है।

🏢 अन्य गंभीर चिंताएं और भविष्य की राह

इसके अलावा, कोलकाता स्थित कंपनी के हेड ऑफिस बिल्डिंग का रजिस्ट्रेशन भी अधूरा बताया गया है। ऑडिटर ने कहा है कि वे तिमाही आधार पर माइन स्टॉक पोजीशन में हुए बदलावों और उसकी प्रामाणिकता पर कोई टिप्पणी करने में असमर्थ हैं, क्योंकि कंपनी की ओर से स्वतंत्र सर्वे द्वारा तिमाही मूल्यांकन (Quarterly Assessment) नहीं किया जाता है। हालांकि, कंपनी वार्षिक आधार पर क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव एनालिसिस ज़रूर करती है।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए वित्तीय नतीजे 'गोइंग कंसर्न बेसिस' (Going Concern Basis) पर तैयार किए गए हैं।

📉 निवेशकों के लिए आगे क्या?

ऑडिटर की इन गंभीर चिंताओं के कारण कंपनी के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी होंगी कि कंपनी Belkundi और Bhadrasahi खदानों के लिए सरकारी अनुमतियां कब हासिल करती है और ज़मीन के मालिकाना हक से जुड़े विवादों व अतिक्रमण की समस्याओं का समाधान कैसे करती है। इन महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने में कंपनी की सफलता ही उसके संचालन को फिर से पटरी पर लाने और वित्तीय सेहत सुधारने के लिए निर्णायक साबित होगी।

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