Odisha सरकार ने बिना PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए जुर्माने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ₹10,000 का फ्लैट जुर्माना खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह वाहनों की श्रेणी के आधार पर 'ग्रेड सिस्टम' लागू किया गया है।
ओडिशा सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) के नियमों को लेकर अपनी इंफोर्समेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां बिना PUC के पकड़े जाने पर सीधा ₹10,000 का भारी जुर्माना देना पड़ता था, अब सरकार ने इसे वाहनों की कैटेगरी और उल्लंघन की गंभीरता के हिसाब से बांट दिया है।
क्या हैं नए जुर्माने के नियम?
नई व्यवस्था के तहत, पेनल्टी को तीन अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है:
- टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर: पहली बार पकड़े जाने पर ₹1,000 और दोबारा गलती करने पर ₹2,000 का जुर्माना।
- लाइट मोटर व्हीकल्स (कार, कैब, ट्रैक्टर): पहली बार के लिए ₹2,000 और बाद में यह बढ़कर ₹5,000 हो जाएगा।
- हेवी और ट्रांसपोर्ट वाहन: ये सबसे ऊंची कैटेगरी में हैं, जहाँ पहली बार के लिए ₹3,000 और दोबारा उल्लंघन पर ₹6,000 का प्रावधान है।
ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए मतलब
लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट बिजनेस से जुड़ी कंपनियों के लिए यह बदलाव 'एडमिनिस्ट्रेटिव कंप्लायंस' के नजरिए से काफी अहम है। भले ही अधिकतम जुर्माने की राशि पहले से कम हो गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जिन वाहनों के ई-चालान 90 दिनों से ज्यादा पुराने पेंडिंग हैं, उन्हें नए पोल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने में दिक्कत आ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक केस स्टडी की तरह है कि कैसे राज्य सरकारें रोड सेफ्टी और आम जनता की जेब के बीच तालमेल बैठा रही हैं। हालांकि यह नियम अभी ओडिशा में लागू है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स नजर रख रहे हैं कि क्या अन्य राज्य भी इसी तरह का 'ग्रेड पेनल्टी स्ट्रक्चर' अपनाते हैं या नहीं। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए मुख्य जोखिम जुर्माने की राशि नहीं, बल्कि दस्तावेजों में कमी के कारण होने वाली ऑपरेशनल देरी है।
