ओडिशा सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों के लिए सैलरी से ऑटोमैटिक कटौती (Automatic Deduction) का नियम लागू किया है, जो कोर्ट द्वारा तय मेंटेनेंस या एलिमनी का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
ओडिशा सरकार ने एक नया प्रशासनिक निर्देश जारी किया है जिसके तहत अब राज्य सरकार के उन कर्मचारियों की सैलरी से कोर्ट द्वारा अनिवार्य एलिमनी और मेंटेनेंस का पैसा सीधे काट लिया जाएगा, जो इसका भुगतान करने में आनाकानी कर रहे हैं। इस कदम का मुख्य मकसद अदालती आदेशों का पालन सुनिश्चित करना है ताकि तलाकशुदा जीवनसाथी और बच्चों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कोई रुकावट न आए।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर शुरू की गई इस प्रक्रिया में, विभागीय 'ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स' (DDOs) की जिम्मेदारी तय की गई है। ये अधिकारी बकाया मेंटेनेंस की पहचान करेंगे और उसे कर्मचारी की मासिक सैलरी से काटकर सीधे लाभार्थियों के अकाउंट में ट्रांसफर करेंगे। इसके लिए राज्य के 'Human Resource Management System' (HRMS) को अपग्रेड किया जा रहा है।
ऑटोमेशन और चुनौतियां
इस डिजिटल बदलाव से मानवीय गलतियों और प्रशासनिक देरी में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, इसे लागू करने में कुछ तकनीकी और कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। संवेदनशील अदालती डेटा की सुरक्षा और सैलरी में किसी भी तरह की गड़बड़ी पर कर्मचारियों द्वारा उठाए जाने वाले विवादों को सुलझाना सरकार के लिए प्राथमिकता होगी। भविष्य में यह सिस्टम कितना प्रभावी साबित होता है, यह HRMS की स्थिरता और शिकायतों के निपटारे के लिए बनने वाले मैकेनिज्म पर निर्भर करेगा।
