Odisha में अब फ्री में सीखें म्यूचुअल फंड, रिटेल इन्वेस्टिंग को मिलेगा बढ़ावा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Odisha में अब फ्री में सीखें म्यूचुअल फंड, रिटेल इन्वेस्टिंग को मिलेगा बढ़ावा

ओडिशा सरकार ने राज्य के कॉलेज छात्रों के लिए फ्री म्यूचुअल फंड सर्टिफिकेशन कोर्स लॉन्च किए हैं। इसका मकसद टियर-II शहरों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना है। यह कदम उन शहरों में म्यूचुअल फंड की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच उठाया गया है, जहां 2019 से बाजार हिस्सेदारी में 57% की वृद्धि देखी गई है।

ओडिशा में निवेश का नया दौर

ओडिशा सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत राज्य के कॉलेज छात्रों को अब फ्री में म्यूचुअल फंड सर्टिफिकेशन कोर्स कराए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में रिटेल निवेशकों का एक मजबूत आधार तैयार करना है, जो बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स के कामकाज को समझते हों। यह कदम युवा पीढ़ी में लंबी अवधि की संपत्ति बनाने की आदतों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, खासकर उन क्षेत्रों में जो पारंपरिक वित्तीय केंद्रों से बाहर हैं।

ओडिशा में निवेश के ट्रेंड्स

हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि ओडिशा के निवासी स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में कैसे निवेश कर रहे हैं, इसमें एक बड़ा बदलाव आया है। कटक (Cuttack) खास तौर पर एक उभरती हुई कहानी बनकर उभरा है, जहां 2019 और 2026 के बीच कुल म्यूचुअल फंड बाजार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 57% बढ़ी है। खास तौर पर, 2019 में शहर की बाजार हिस्सेदारी 0.07% थी, जो 2026 तक बढ़कर 0.11% हो गई। पिछले तीन सालों में इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भुवनेश्वर (Bhubaneswar) राज्य का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड हब बना हुआ है, जिसकी बाजार में हिस्सेदारी 0.27% है, जो 2019 के 0.23% की तुलना में अधिक है। हालांकि, इस मुख्य केंद्र में भी 2026 की हिस्सेदारी 2025 की तुलना में थोड़ी कम रही है। वहीं, राउरकेला (Rourkela) में अलग ट्रेंड देखने को मिला है, जहां 2019 में बाजार हिस्सेदारी 0.10% थी, जो 2026 में घटकर 0.08% रह गई है। इससे पता चलता है कि बढ़ते क्षेत्रों में भी निवेश भागीदारी घट-बढ़ सकती है।

टियर-II शहरों की बढ़ती भागीदारी

ओडिशा का यह प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े बदलाव को दर्शाता है, जहां टियर-II शहरों में म्यूचुअल फंड की पैठ, देश के बड़े मेट्रो शहरों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, धनबाद (Dhanbad) की बाजार हिस्सेदारी 0.12% से बढ़कर 0.33% हो गई है, और गांधीनगर (Gandhinagar) 0.08% से बढ़कर 0.18% पर पहुंच गया है। इसी तरह, थ्रिस्सूर (Thrissur), कोल्हापुर (Kolhapur), और बेलगावी (Belagavi) जैसे अन्य शहरों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में वित्तीय उत्पादों के प्रति बढ़ती मांग को दिखाता है।

छोटे शहरों में तेज ग्रोथ के बावजूद, भारत के बड़े शहर अभी भी बाजार के अधिकांश हिस्से पर कब्जा जमाए हुए हैं। 2026 तक, मुंबई 29% बाजार हिस्सेदारी के साथ अग्रणी बना हुआ है, इसके बाद दिल्ली 15.5% और बेंगलुरु 5.92% पर है। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि छोटे शहर भले ही गति पकड़ रहे हों, लेकिन स्थापित वित्तीय केंद्र अभी भी अधिकांश निवेश प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। भविष्य में, ओडिशा के सर्टिफिकेशन प्रोग्राम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह युवाओं में लंबे समय तक चलने वाले सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) इनफ्लो और बेहतर वित्तीय साक्षरता में कितनी सफलतापूर्वक तब्दील होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.