ओडिशा के **13** जिलों में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। हिरकुड डैम का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए गेट खोले गए हैं, जिससे निचले इलाकों में सप्लाई चेन और कृषि पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
ओडिशा में भारी बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में आई बाढ़ के चलते 70,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और उन्हें 395 राहत शिविरों में रखा गया है। महानदी, सुवर्णरेखा और बुधबलंग जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे सड़कों और मकानों को भारी नुकसान हुआ है।
डैम मैनेजमेंट और निचले इलाकों का जोखिम
स्थितियों को काबू में करने के लिए हिरकुड डैम के 16 स्लुइस गेट खोल दिए गए हैं। डैम का जलस्तर 630 फीट की अधिकतम क्षमता के करीब है। पानी छोड़े जाने से जाजपुर और कालाहांडी जैसे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर जलेश्वर में 11.07 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि बुधबलंग नदी का पानी बारीपदा नगरपालिका तक पहुंच गया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमी पर मार
बाढ़ ने स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पेश की है। कई पुल और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की आवाजाही ठप पड़ गई है। कोरापुट जिले के कोटपाड ब्लॉक में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है, वहीं सुरक्षा के मद्देनजर देवकुंड जैसे पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया गया है।
फिलहाल राहत कार्य के लिए ओडीआरएफ (ODRF) की 33 टीमें, एनडीआरएफ (NDRF) की 3 यूनिट्स और 300 फायर सर्विस कर्मी तैनात हैं। कृषि क्षेत्र के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि फसलें बर्बाद होने से कमोडिटी सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। उद्योगों को भी लॉजिस्टिक बाधाओं और काम रुकने के कारण अस्थायी सुस्ती का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे डैम के जलस्तर और इन्फ्रास्ट्रक्चर मरम्मत के काम पर नजर रखें।
