ओडिशा में भारी बारिश और हीराकुंड डैम से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का संकट गहरा गया है। प्रशासन ने अब तक **1.4 लाख** निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
ओडिशा सरकार ने राज्य के कई जिलों में मची तबाही को देखते हुए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। भारी बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण 7,800 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं।\n\n### डैम और नदियों का हाल\n\nजल संसाधन विभाग (Water Resources Department) के अनुसार, हीराकुंड डैम के 30 स्लुइस गेट खोल दिए गए हैं। कटक के मुंडली गेज स्टेशन पर जल प्रवाह 8 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया है। महानदी के अलावा, बालासोर, भद्रक और मयूरभंज जिलों में सुवर्णरेखा और बुधाबलंग नदियां भी उफान पर हैं।\n\n### अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?\n\nबाढ़ का सबसे बुरा असर खेती और बुनियादी ढांचे पर पड़ा है। अकेले बालासोर में 3.5 लाख लोग प्रभावित हैं, जिससे स्थानीय कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप हो गई है। किसानों को अपनी खड़ी फसलों के बर्बाद होने का डर सता रहा है।\n\nफिलहाल राहत की बात यह है कि अधिकारियों को मंगलवार तक बाढ़ का स्तर स्थिर होने की उम्मीद है। इसके बाद ही सड़कों, पुलों और कृषि उत्पादन को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। अब प्रशासन का मुख्य ध्यान निकासी प्रणालियों (Drainage systems) को दुरुस्त करने पर है ताकि खेतों से पानी जल्दी निकल सके और फसलें पूरी तरह नष्ट होने से बच जाएं।
