ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने देशभर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का समर्थन किया है। विपक्ष ने **13 करोड़** मतदाताओं के नाम काटने का आरोप लगाया है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इनमें मृत, डुप्लीकेट और शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम शामिल हैं।
विवाद का केंद्र: 13 करोड़ मतदाताओं का डेटा
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग (ECI) ने बिना उचित प्रक्रिया के लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को लिस्ट से हटा दिया है, जिसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग उठ रही है। हालांकि, ECI का तर्क है कि यह डेटा केवल मृत लोगों, अपना स्थान बदल चुके मतदाताओं और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की एक मानक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य चुनावी धांधली को रोकना है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद
इस प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग की कई कार्यप्रणालियों पर औपचारिक आपत्तियां जताई हैं। ये आंतरिक मतभेद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
ओडिशा पर असर
ओडिशा के मामले में आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 सितंबर, 2026 को प्रकाशित अंतिम इलेक्टोरल रोल के अनुसार, राज्य में कुल 3.16 करोड़ मतदाता हैं। इस संशोधन प्रक्रिया के दौरान राज्य में 17 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि ये नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है, ताकि किसी भी पात्र नागरिक के नाम कटने से होने वाले कानूनी विवादों और सामाजिक तनाव से बचा जा सके।
