विपक्ष के नेता Naveen Patnaik ने ओडिशा सरकार को Kotia बॉर्डर विवाद को लेकर निशाने पर लिया है। Andhra Pradesh द्वारा विवादित गांवों में स्थानीय चुनाव कराने की घोषणा के बाद प्रशासनिक नियंत्रण और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनावी विवाद से गरमाया माहौल
Kotia ग्राम पंचायत को लेकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच का क्षेत्रीय विवाद फिर से सुर्खियों में है। इस बार तनाव तब बढ़ा जब आंध्र प्रदेश ने 3 विवादित गांवों—फागुणासिनेरी (Phagunasineri), गंजेईपादार (Ganjeipadar), और फाटुसिनेरी (Phatusineri)—में स्थानीय चुनाव कराने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने इसे लेकर मौजूदा BJP सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक गठबंधन के कारण ओडिशा सरकार पड़ोसी राज्य के खिलाफ सख्त रुख अपनाने में हिचकिचा रही है।
दशकों पुराना कानूनी पेंच
यह मामला ओडिशा के कोरापुट जिले के 28 गांवों के क्लस्टर से जुड़ा है, जिनमें से 21 गांवों पर दोनों राज्य अपना दावा ठोकते हैं। इसका कानूनी इतिहास 1968 के सुप्रीम कोर्ट के स्टेटस-को (Status Quo) ऑर्डर से जुड़ा है। जनवरी 2022 में ओडिशा सरकार ने औपचारिक रूप से कानूनी चुनौती दी थी, जो अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
सरकार का क्या है रुख?
ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन आंध्र प्रदेश को चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। कोरापुट जिला कलेक्टर और राजस्व संभागीय आयुक्त को क्षेत्र पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
Kotia क्षेत्र अपनी खनिज क्षमता के लिए जाना जाता है। इस तरह के सीमा विवाद अक्सर प्रशासनिक अनिश्चितता पैदा करते हैं। जब क्षेत्रीय दावे अनसुलझे रहते हैं, तो इससे अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है, जिससे जमीन क्लीयरेंस, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और व्यावसायिक रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी होती है। निवेशक और स्टेकहोल्डर इस राजनीतिक घर्षण पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर गवर्नेंस और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को प्रभावित करता है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार जमीन पर स्टेटस-को कैसे बनाए रखती है।
