Nutraplus India Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 (31 मार्च 2025 को समाप्त) के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिनमें ₹5,00,961 का शुद्ध नुकसान (Net Loss) दर्ज किया गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY24) के ₹6,15,824 के नुकसान की तुलना में यह मामूली सुधार है। लेकिन, असली चिंता ऑडिटर की रिपोर्ट से उपजी है, जिन्होंने कंपनी की 'Going Concern' (यानी, भविष्य में अपना कारोबार जारी रखने की क्षमता) पर ही गंभीर संदेह जताया है।
कंपनी की यह गंभीर चिंता उसके बेहद खराब वित्तीय हालात का नतीजा है। Nutraplus India का नेट वर्थ (Net Worth) बुरी तरह घट चुका है, कंपनी नेगेटिव वर्किंग कैपिटल (Negative Working Capital) के जाल में फंसी है और कैश फ्लो (Cash Flow) भी लगातार नकारात्मक बना हुआ है।
इस 'Going Concern' शंका के पीछे सबसे बड़ी वजह ₹76.24 करोड़ का सरस्वती बैंक (Saraswat Bank) से लिया गया लोन चुकाने में डिफॉल्ट (Loan Default) करना है। इस डिफॉल्ट के कारण बैंक ने कंपनी की सभी संपत्तियों को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया था, जिसने कंपनी के परिचालन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
यही नहीं, कंपनी के अंदर भी कई गंभीर गवर्नेंस लैप्स (Governance Lapses) देखे गए हैं। ऑडिटर ने अपर्याप्त इंटरनल कंट्रोल्स (Internal Controls) का भी जिक्र किया है। नियामक संस्था SEBI ने भी पहले Nutraplus India के शेयर की कीमतों में हेरफेर (manipulation) के मामलों में कार्रवाई की है और धोखाधड़ी वाले ट्रेडिंग प्रथाओं के लिए जुर्माने लगाए हैं। वर्तमान में, कंपनी के बोर्ड का गठन ठीक से नहीं है, जरूरी वैधानिक अधिकारी (statutory officers) गायब हैं और बैठकों की प्रक्रियाओं में भी खामियां हैं।
इन सबके चलते, शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए अनिश्चितता का माहौल है। कंपनी अपनी देनदारियों (liabilities) को समय पर पूरा कर पाएगी या नहीं, इस पर बड़ा सवाल है, जिसका सीधा असर उसके परिचालन की निरंतरता पर पड़ेगा।
मुख्य जोखिम (Risks) जिन्हें निवेशकों को देखना चाहिए:
- Going Concern Uncertainty: ऑडिटर ने कंपनी के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिए हैं।
- Loan Default & Asset Loss: ₹76.24 करोड़ के डिफॉल्ट ने कंपनी को संपत्तिहीन कर दिया है।
- Governance Deficiencies: बोर्ड और प्रबंधन में गंभीर खामियां।
- Regulatory Non-Compliance: SEBI के नियमों का उल्लंघन और अनपेक्षित लिस्टिंग फीस।
- Inadequate Internal Controls: आंतरिक नियंत्रणों की कमजोरी से परिचालन जोखिम बढ़ रहा है।
31 मार्च 2025 तक कंपनी के संचित नुकसान (accumulated losses) ₹62.57 करोड़ तक पहुंच गए थे।
निवेशक अब कंपनी की बैंकों के साथ नई लोन और ओवरड्राफ्ट सुविधाओं (loan and overdraft facilities) के लिए चल रही बातचीत पर नजर रखेंगे। साथ ही, संचालन जारी रखने के लिए बाहरी निवेश (external investments) जुटाने की कंपनी की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी। SEBI या स्टॉक एक्सचेंजों से किसी भी नई नियामक कार्रवाई या खुलासे पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।