8th Pay Commission की चंडीगढ़ में हुई बैठकों के दौरान नर्सिंग एसोसिएशंस ने पे-मैट्रिक्स में बदलाव की मांग की है। इसमें **3.25** के फिटमेंट फैक्टर और ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली शामिल है, जिसका असर **3 लाख** से ज्यादा केंद्रीय स्वास्थ्य कर्मचारियों पर पड़ेगा।
चंडीगढ़ में हाल ही में 8th Central Pay Commission की दो दिवसीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन संपन्न हुई है। इसमें Nurses Welfare Association और PGIMER जैसे संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को मजबूती से रखा। यह फीडबैक आगामी फाइनल रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
वेतन और भत्तों में बड़े बदलाव की तैयारी
नर्सिंग अधिकारियों ने मौजूदा पे-स्ट्रक्चर में संशोधन के लिए कई अहम प्रस्ताव दिए हैं। सबसे प्रमुख मांग एंट्री-लेवल पे को Level 10 पर फिक्स करने की है। इसके अलावा, 3.25 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है, जो बेसिक सैलरी को सीधे तौर पर बढ़ा देगा। तुलना के लिए, 7th Pay Commission में यह मल्टीप्लायर 2.57 था।
अन्य मांगों में एनुअल इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 5% करना, नाइट ड्यूटी अलाउंस शुरू करना और रिस्क-हार्डशिप अलाउंस को शामिल करना शामिल है। साथ ही, नेशनल पेंशन सिस्टम के बजाय पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को बहाल करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई है।
सरकारी खजाने पर असर और आगे की राह
ये बदलाव AIIMS, ESIC अस्पतालों और अन्य सरकारी संस्थानों के 3 लाख से अधिक कर्मचारियों के वेतन बिल को सीधे प्रभावित करेंगे। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यदि ये मांगें मान ली जाती हैं, तो सरकार का कुल खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) लक्ष्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग पर पड़ सकता है।
फिलहाल, आयोग ने किसी भी मांग को स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया है। अगली बैठक 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में निर्धारित है। सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही ये बदलाव प्रभावी होंगे, इसलिए बाजार की नजरें अब आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
