Novartis India से Novartis AG की बड़ी बिकवाली
स्विट्जरलैंड की दिग्गज फार्मा कंपनी Novartis AG ने भारत में अपने लिस्टेड कमर्शियल ऑपरेशंस से एक महत्वपूर्ण एग्जिट (Exit) की घोषणा की है। कंपनी ने अपनी भारतीय सब्सिडियरी Novartis India Limited में अपनी 70.68% हिस्सेदारी WaveRise Investments Limited, ChrysCapital Fund X और Two Infinity Partners के कंसोर्टियम को बेचने का पक्का करार किया है।
पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए 'ओपन ऑफर' का मतलब
यह डील SEBI के नियमों के तहत एक 'अनिवार्य ओपन ऑफर' (Mandatory Open Offer) को ट्रिगर करती है। इसका मतलब है कि खरीदार कंसोर्टियम को Novartis India के सभी पब्लिक शेयरहोल्डर्स से, जिन्होंने अभी तक अपने शेयर नहीं बेचे हैं, उनसे शेयर खरीदने का प्रस्ताव देना होगा। यह रेगुलेटर द्वारा तय की गई उचित कीमत पर होगा, ताकि माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा हो सके।
रणनीतिक बदलाव और डील के पीछे की कहानी
Novartis AG वैश्विक स्तर पर अपने ऑपरेशंस को स्ट्रीमलाइन (Streamline) कर रही है। कंपनी का R&D और कमर्शियल सेंटर, Novartis Healthcare Private Limited, Novartis AG के पास ही रहेगा, जो भारत से पूर्ण निकासी के बजाय रणनीतिक फोकस में बदलाव का संकेत देता है। इससे पहले, मार्केट की अस्थिरता और वैल्यूएशन को लेकर इस डील में कुछ रुकावटें थीं, लेकिन अब एक निश्चित शेयर खरीद समझौते (Share Purchase Agreement - SPA) पर हस्ताक्षर हो गए हैं।
Novartis India: आंकड़े और वित्तीय प्रदर्शन
Novartis India Limited की मार्केट कैप लगभग ₹2,000-2,100 करोड़ के बीच है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के अंत तक, कंपनी ने ₹348 करोड़ का रेवेन्यू और लगभग ₹97 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। हालांकि, कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। पिछले पांच सालों में इसके रेवेन्यू में औसतन 4.06% की सालाना गिरावट देखी गई है। वहीं, FY26 की तीसरी तिमाही में रेवेन्यू 8.64% और नेट प्रॉफिट 36.78% तक गिर गया। इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लगभग 12-13% है।
खरीदार कौन हैं और आगे क्या उम्मीद?
WaveRise Investments Limited, ChrysCapital Fund X और Two Infinity Partners जैसी इन्वेस्टमेंट फर्म्स अब Novartis India के भविष्य की बागडोर संभालेगी। यह उम्मीद की जा रही है कि वे कंपनी के मौजूदा बिजनेस को ऑप्टिमाइज़ (Optimize) करने या नए विकास के अवसर तलाशने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह बिकवाली नए स्वामित्व के साथ एक अलग रणनीतिक दृष्टिकोण का संकेत देती है।
ऐतिहासिक नियामक चुनौतियां
Novartis AG का अतीत वैश्विक स्तर पर नियामक जांचों से भी जुड़ा रहा है। 2020 में, कंपनी ने $345 मिलियन का भुगतान करके FCPA (Foreign Corrupt Practices Act) के उल्लंघन से जुड़े मामलों का समाधान किया था। भारत में भी, कंपनी पर 2014 में पशु उत्पाद पंजीकरण के लिए फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप लगे थे, जिसके चलते इंपोर्ट लाइसेंस रद्द हो गए थे। साथ ही, प्राइसिंग नियमों के उल्लंघन के लिए भी भारी जुर्माने का सामना करना पड़ा था।
कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और आगे की राह
Novartis India भारतीय फार्मा सेक्टर में काम करती है, जो Sun Pharma, Dr. Reddy's Laboratories, Cipla जैसी कंपनियों के साथ बेहद प्रतिस्पर्धी है। यह ट्रेंड कई MNCs द्वारा अपने भारतीय कमर्शियल ऑपरेशंस बेचने और R&D पर ध्यान केंद्रित करने के वैश्विक पैटर्न के अनुरूप है। निवेशकों के लिए, ओपन ऑफर की शर्तों को समझना और नए मैनेजमेंट की रणनीति पर नजर रखना अहम होगा।