देश के टॉप IIMs में नॉन-इंजीनियर्स का दबदबा बढ़ रहा है। 2026-28 के नए बैच के लिए इनकी हिस्सेदारी बढ़कर **44%** हो गई है। यह बदलाव कॉर्पोरेट जगत में अलग-अलग तरह की प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स की बढ़ती मांग को दर्शाता है, बजाय कि पारंपरिक इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के।
टॉप IIMs में क्लासरूम का बदलता मंज़र!
भारत केpremier Indian Institutes of Management (IIMs) के क्लासरूम में बड़ा बदलाव आ रहा है। 2026-28 एकेडमिक सेशन के आंकड़े बताते हैं कि अब लीडिंग IIMs में लगभग 44% छात्र ऐसे हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग नहीं की है। यह 2024-26 बैच के 37% के मुकाबले एक बड़ी बढ़ोतरी है। दस साल पहले, नॉन-इंजीनियर्स की हिस्सेदारी अक्सर सिर्फ 10% से 15% तक ही सीमित थी।
बड़े कैंपस में दिख रहा विविधता का असर
यह विविधता सिर्फ कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि टॉप-टियर संस्थानों में इसका असर साफ दिख रहा है। IIM इंदौर और IIM कोझिकोड में कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, मेडिसिन, लॉ और ह्यूमैनिटीज जैसे बैकग्राउंड से आए छात्रों की संख्या अब मेजॉरिटी में है, जो क्रमशः 54% और 57% हैं। वहीं, IIM बैंगलोर में भी नॉन-इंजीनियर छात्रों का प्रतिनिधित्व एक-तिहाई तक पहुंच गया है। IIM अहमदाबाद, बैंगलोर, कलकत्ता, इंदौर और कोझिकोड जैसे पांच प्रमुख IIMs को मिलाकर, नॉन-इंजीनियर छात्रों की संख्या दो साल पहले के 884 से बढ़कर 1,065 हो गई है।
एडमिशन पॉलिसी में सोची-समझी रणनीति
IIM के डायरेक्टर्स का कहना है कि यह बदलाव जानबूझकर किया गया है। एडमिशन प्रक्रियाओं को स्टैंडर्ड टेस्ट स्कोर और एकेडमिक डाइवर्सिटी पॉइंट्स के बीच संतुलन बनाने के लिए अपडेट किया गया है। IIM कोझिकोड के डायरेक्टर देबाशीष चटर्जी के अनुसार, यह तरीका नॉन-टेक्निकल फील्ड्स के उम्मीदवारों को समान अवसर देने के लिए है, जो अपने अनोखे एनालिटिकल और क्रिएटिव नजरिए लाते हैं। इंजीनियरिंग डिग्री को ऐतिहासिक प्राथमिकता कम करके, ये संस्थान क्लासरूम डिस्कशन और कोलैबोरेटिव लर्निंग एन्वायरमेंट को बेहतर बनाना चाहते हैं, जो आज के कॉर्पोरेट परिदृश्य की जटिलताओं को दर्शाते हैं।
इंटरडिसिप्लिनरी टैलेंट की कॉर्पोरेट डिमांड
छात्रों की इस जनसांख्यिकीय शिफ्ट का मुख्य कारण टॉप रिक्रूटर्स की बदलती जरूरतें हैं। कंपनियां मैनेजमेंट टैलेंट में एनालिटिकल क्षमता के साथ-साथ विभिन्न तरह की प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स भी खोज रही हैं, जो अक्सर पारंपरिक इंजीनियरिंग प्रोग्राम के बाहर विकसित होती हैं। Axis Bank की HR लीडर राजकमल वेम्पटी जैसी हस्तियों ने बताया है कि आधुनिक कॉर्पोरेट भूमिकाओं में ऐसे टैलेंट की जरूरत है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरडिसिप्लिनरी टेक्नोलॉजी से बदल रही अर्थव्यवस्था को नेविगेट कर सके। जैसे-जैसे बिज़नेस टेक्निकल प्रोफिशिएंसी के साथ-साथ क्रिएटिविटी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं, एकेडमिक इनटेक में विविधता लाने की यह पहल जारी रहने की उम्मीद है। निवेशक और इंडस्ट्री ऑब्ज़र्वर्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि प्लेसमेंट सीजन में ये ग्रेजुएट्स कैसा प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि इस बदलाव की सफलता अंततः रिक्रूटर्स की इस विविध टैलेंट पूल के लिए भविष्य की मांग से मापी जाएगी।
