ब्रोकरेज फर्म Nomura ने भारती एयरटेल (Bharti Airtel) के शेयर के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर **₹2,355** कर दिया है। कंपनी के प्रति पॉजिटिव नजरिया बरकरार रखते हुए, ब्रोकरेज का मानना है कि टेलीकॉम दिग्गज फिलहाल अपने प्रतिद्वंद्वी Reliance Jio की तुलना में काफी अंडरवैल्यूड (undervalued) है।
आखिर क्या है खास?
Nomura ने भारती एयरटेल के शेयर के लिए टारगेट प्राइस को पिछले ₹2,220 से बढ़ाकर ₹2,355 कर दिया है। फर्म का कंपनी पर पॉजिटिव रुख बना हुआ है, और उनका मानना है कि स्टॉक मार्केट ने अभी तक कंपनी की कई खूबियों का पूरा अंदाजा नहीं लगाया है। यह अपडेट ऐसे समय में आया है जब कंपनी अपने प्रति ग्राहक रेवेन्यू (revenue) बढ़ाने और क्लाउड व डेटा सेंटर जैसी डिजिटल सेवाओं में विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
वैल्यूएशन की तुलना (Valuation Comparison)
रिपोर्ट का एक मुख्य तर्क यह है कि भारती एयरटेल फिलहाल अपने मुख्य प्रतिस्पर्धी, रिलायंस जियो (Reliance Jio) की तुलना में कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। Nomura का अनुमान है कि एयरटेल के इंडिया टेलीकॉम बिजनेस का वैल्यूएशन उसके ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) के लगभग 9.3 गुना है, जबकि रिलायंस जियो का वैल्यूएशन लगभग 12.2 गुना है। ब्रोकरेज का कहना है कि यह अंतर जायज नहीं है, खासकर जब एयरटेल प्रति ग्राहक कमाई और कैश फ्लो जेनरेट करने की क्षमता में मजबूत मैट्रिक्स दिखाता है।
ग्रोथ की राह और बिजनेस में बदलाव
Nomura को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2029 के बीच भारती एयरटेल के ऑपरेटिंग प्रॉफिट और फ्री कैश फ्लो में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिलेगी। इस उम्मीद के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं। पहला, फर्म का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की तीसरी तिमाही में एक और टैरिफ हाइक (tariff hike) हो सकती है, जिससे कंपनी की आय बढ़ेगी। दूसरा, जैसे-जैसे कंपनी अपना 5G नेटवर्क रोलआउट पूरा करेगी, नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर उसका खर्च कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनी के पास कर्ज घटाने और अन्य उपयोगों के लिए अधिक कैश उपलब्ध होगा। इसके अलावा, कंपनी डिजिटल सेवाओं, लेंडिंग और इंडस टावर्स (Indus Towers) में अपनी बढ़ी हुई हिस्सेदारी के जरिए रेवेन्यू बढ़ा रही है।
FII का रिस्क फैक्टर
हालांकि रिपोर्ट काफी हद तक पॉजिटिव है, लेकिन इसमें शेयरधारकों के लिए एक खास जोखिम भी बताया गया है। भारती एयरटेल का लगभग 28% हिस्सा फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के पास है। इस बड़ी होल्डिंग के कारण, जब भी ग्लोबल मार्केट में दबाव आता है या विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालते हैं, तो स्टॉक पर अतिरिक्त सेलिंग प्रेशर (selling pressure) पड़ सकता है। इसका मतलब है कि कंपनी के अपने बिजनेस परफॉर्मेंस के स्थिर रहने के बावजूद, स्टॉक की कीमत ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट के आधार पर ऊपर-नीचे हो सकती है।
निवेशकों के लिए ट्रैक करने लायक चीजें
स्टॉक पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, अगली महत्वपूर्ण बात टेलीकॉम टैरिफ में बदलावों के बारे में कोई भी घोषणा होगी। निवेशक कंपनी की औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता पर भी नजर रखना चाहेंगे, क्योंकि मार्केट तीन प्रमुख खिलाड़ियों में कंसॉलिडेट हो रहा है। इसके अतिरिक्त, 5G रोलआउट के निष्कर्ष के साथ फ्री कैश फ्लो में अपेक्षित सुधार की पुष्टि के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के ट्रेंड पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
