Niti Aayog की बड़ी पहल: फूड सेफ्टी में "Farm-to-Fork" ट्रैकिंग, बीमारियों पर लगेगा लगाम!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Niti Aayog की बड़ी पहल: फूड सेफ्टी में "Farm-to-Fork" ट्रैकिंग, बीमारियों पर लगेगा लगाम!

Niti Aayog भारत में "Farm-to-Fork" यानी खेत से लेकर आपकी थाली तक, फूड सेफ्टी को लेकर एक बड़ी राष्ट्रीय पहल शुरू करने जा रहा है। इसका मुख्य मकसद हर साल होने वाली **10 करोड़** फूड-जनित बीमारियों को कम करना है, जिसके लिए टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन की क्वालिटी को बेहतर बनाया जाएगा।

खेत से थाली तक, अब फूड सेफ्टी का पूरा हिसाब

भारत सरकार ने राष्ट्रीय फूड सेफ्टी ढांचे को एक बड़ा अपडेट देने की तैयारी कर ली है। Niti Aayog इस "Farm-to-Fork" ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने के लिए अगुवाई कर रहा है। इस पहल का मकसद एग्रीकल्चर सोर्स से लेकर रिटेल काउंटर तक, हर फूड प्रोडक्ट की निगरानी करना है। खासकर, केमिकल रेसिड्यू (chemical residues) का पता लगाना और सप्लाई चेन के हर स्टेज पर मिलावट को रोकना इसका खास ध्यान रहेगा।

टेस्टिंग और सर्विलांस का होगा विस्तार

फूड सेफ्टी के इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, Niti Aayog के सदस्य M Srinivas की अध्यक्षता में हुई चर्चाओं में ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज (global best practices) को अपनाने पर जोर दिया गया है। सरकार देशभर में मान्यता प्राप्त फूड-टेस्टिंग लैब्स (food-testing laboratories) का नेटवर्क बढ़ाने की योजना पर विचार कर रही है। साथ ही, इंडिपेंडेंट थर्ड-पार्टी सैंपलिंग (independent third-party sampling) बढ़ाने और बाजारों व प्रोडक्शन सेंटरों पर रियल-टाइम स्क्रीनिंग (real-time screenings) के लिए मोबाइल टेस्टिंग यूनिट्स (mobile testing units) की तैनाती पर भी फोकस है। फूड टेस्टिंग और इंस्पेक्शन इंडस्ट्री के लिए, यह विकास एक बड़ा मौका लेकर आया है, जिससे मान्यता प्राप्त लैब सेवाओं और एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजीज (advanced diagnostic technologies) की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

सप्लाई चेन और कंप्लायंस पर असर

इस पहल का एक और अहम हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडर्नाइजेशन (modernization) है। अधिकारी कोल्ड-चेन (cold-chain) और एफिशिएंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (efficient transport systems) की भूमिका का मूल्यांकन कर रहे हैं, ताकि स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान फूड स्पॉइलेज (food spoilage) और कंटैमिनेशन (contamination) को कम किया जा सके। बिजनेस ऑपरेशंस (business operations) में एक बड़ा संभावित बदलाव यह हो सकता है कि फूड बिजनेस के लिए क्रेडिट (credit) की उपलब्धता सीधे उनके फूड सेफ्टी कंप्लायंस स्कोर (food safety compliance scores) से जोड़ी जाएगी। यह मैकेनिज्म कंपनियों को क्वालिटी कंट्रोल के सख्त उपाय अपनाने के लिए सीधा फाइनेंशियल इंसेंटिव (financial incentive) देगा।

इसके अलावा, सरकार डेटा एनालिटिक्स (data analytics) का उपयोग करके एडल्टरेशन हॉटस्पॉट्स (food adulteration hotspots) की पहचान और निगरानी करने की योजना बना रही है। यह क्रॉप प्रोडक्शन डेटा (crop production data), यील्ड्स (yields) और मार्केट प्राइसिंग पैटर्न्स (market pricing patterns) को क्रॉस-रेफरेंस (cross-referencing) करके किया जाएगा। यह एविडेंस-बेस्ड अप्रोच (evidence-based approach) वर्तमान मैनुअल प्रक्रियाओं की तुलना में एनफोर्समेंट (enforcement) को स्ट्रीमलाइन (streamline) करने और इंस्पेक्शन को अधिक प्रभावी ढंग से टारगेट करने के इरादे से है।

पब्लिक हेल्थ बर्डन को संबोधित करना

इन सुधारों की ओर यह कदम पब्लिक हेल्थ (public health) की चिंताओं से प्रेरित है, क्योंकि भारत में वर्तमान में हर साल लगभग 10 करोड़ फूड-जनित बीमारियों के मामले सामने आते हैं। अनुमान है कि अगर प्रणालीगत सुधार नहीं किए गए तो 2030 तक यह संख्या 15 से 17 करोड़ तक बढ़ सकती है। चूंकि फूड-जनित बीमारियां राष्ट्रीय बीमारी के बोझ (national disease burden) में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक बनी हुई हैं, इसलिए इन नियमों को आर्थिक उत्पादकता और पब्लिक हेल्थ आउटकम्स (public health outcomes) को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

निवेशकों को ट्रेसिबिलिटी सिस्टम (traceability system) के लागू होने की समय-सीमा और कंप्लायंस-बेस्ड क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल (compliance-based credit scoring model) के रोलआउट पर आगामी पॉलिसी गाइडलाइंस (policy guidelines) पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, लैब एक्रेडिटेशन (laboratory accreditation) की गति और मोबाइल टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (mobile testing infrastructure) के लिए बजट आवंटन पर नज़र रखना भी फूड सेफ्टी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर्स (logistics sectors) में संभावित कैपिटल इन्वेस्टमेंट (capital investment) में बदलावों की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.