Nippon India Nifty Pharma ETF ने पिछले एक महीने में **6.8%** का शानदार रिटर्न देकर बाकी इंडेक्स फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। यह फंड लगातार एक साल और तीन साल में भी अपने बेंचमार्क को मात दे रहा है।
Detailed Coverage
इंडेक्स फंड्स में सबसे आगे Nippon India Nifty Pharma ETF
Nippon India Nifty Pharma ETF इन दिनों इंडेक्स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) कैटेगरी में सबसे तगड़ा परफॉर्मर बनकर उभरा है। 21 जुलाई 2026 को खत्म हुए पिछले एक महीने में इस फंड ने 6.8% का शानदार रिटर्न दिया है। ACE MF के अनुसार, ₹1,500 करोड़ से ज्यादा के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स में यह सबसे आगे है।
परफॉरमेंस की तुलना: कहां रहा अंतर?
फार्मा सेक्टर पर फोकस करने वाले इस ETF की शानदार कमाई के बावजूद, दूसरे बड़े इंडेक्स फंड्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। उदाहरण के लिए, Nippon India ETF Nifty IT, जिसका AUM ₹3,532.7 करोड़ है, उसी महीने 8.0% गिर गया। वहीं, ICICI Prudential Nifty Alpha Low-Volatility 30 ETF ने 3.2% का मामूली रिटर्न दर्ज किया। यह दिखाता है कि कैसे सेक्टर-स्पेशफिक मूवमेंट्स पैसिव फंड्स के नतीजों पर असर डाल सकते हैं।
बेंचमार्क को लगातार मात देने का रिकॉर्ड
Nippon India Nifty Pharma ETF का यह हालिया प्रदर्शन एक लंबी और सफल कहानी का हिस्सा है। इस फंड ने लगातार अपने अंडरलाइंग Nifty Pharma इंडेक्स को मात दी है। पिछले एक साल में, ETF ने 16.4% का रिटर्न दिया, जबकि इसके बेंचमार्क इंडेक्स ने -2.5% का रिटर्न दर्ज किया, यानी 18.9% का बड़ा अंतर। यह ट्रेंड छह महीने की अवधि में भी दिखा, जहां फंड ने 21.3% का रिटर्न दिया। वहीं, तीन साल की अवधि में इसने 22.8% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) पोस्ट किया है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इंडेक्स ETFs में निवेश करने वाले निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि ये फंड किसी खास इंडेक्स के परफॉरमेंस को कॉपी करने के लिए बनाए जाते हैं, न कि अलग-अलग स्टॉक्स चुनकर। ETF का असली मूल्य आंकने के लिए, निवेशक 'ट्रैकिंग डिफरेंस' (फंड के रिटर्न और उसके इंडेक्स के बीच का अंतर) और 'ट्रैकिंग एरर' पर नजर रख सकते हैं। लिक्विडिटी भी एक अहम फैक्टर है, जो यह तय करता है कि फंड की यूनिट्स को एक्सचेंज पर कितनी आसानी से उसके असली वैल्यू के करीब खरीदा या बेचा जा सकता है। चूंकि फार्मा सेक्टर के ETFs इस इंडस्ट्री की हेल्थ के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए भविष्य के रिटर्न इस सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ, एक्सपोर्ट डिमांड और डोमेस्टिक व ग्लोबल फार्मा स्पेस में रेगुलेटरी अपडेट्स पर निर्भर करेंगे।
