Nifty Target 29,000: Emkay Global की बड़ी भविष्यवाणी, जानिए क्यों होगा बाजार में बूम

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty Target 29,000: Emkay Global की बड़ी भविष्यवाणी, जानिए क्यों होगा बाजार में बूम

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Emkay Global Financial Services का मानना है कि Nifty 50 मार्च 2027 तक **29,000** के स्तर को छू सकता है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि कंपनियों की कमाई में **16%** की ग्रोथ देखने को मिलेगी। फर्म ने यह भी कहा है कि मौजूदा वैल्यूएशन (17.8x फॉरवर्ड P/E) आकर्षक हैं, लेकिन यह आउटलुक भू-राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगा।

Emkay Global का मार्केट पर बड़ा अनुमान

Emkay Global Financial Services ने भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा अनुमान जारी किया है। फर्म का मानना है कि Nifty 50 इंडेक्स मार्च 2027 तक 29,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। इस तेजी के पीछे फर्म ने कंपनियों की कमाई (Earnings) में जबरदस्त ग्रोथ और भू-राजनीतिक तनाव में कमी को मुख्य कारण बताया है। Emkay Global के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027 तक भारतीय कंपनियों के प्रति शेयर आय (EPS) में 16% की वृद्धि हो सकती है, जो पिछले तीन सालों में सबसे अधिक होगी।

कमाई और वैल्यूएशन क्यों हैं अहम?

यह अनुमान निवेशकों के लिए इस मायने में खास है कि यह सिर्फ बाजार की भावनाओं पर नहीं, बल्कि कंपनियों की असल कमाई पर केंद्रित है। 16% की EPS ग्रोथ का मतलब है कि कंपनियां अधिक बिक्री करेंगी, अपने खर्चों को बेहतर ढंग से मैनेज करेंगी या बेहतर आर्थिक माहौल का फायदा उठाएंगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Nifty फिलहाल 17.8x के एक साल के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। यह 19.6x के लंबे समय के औसत से कम है, जिससे ब्रोकरेज का मानना है कि बाजार में और तेजी की गुंजाइश है क्योंकि वैल्यूएशन अभी बहुत ज्यादा महंगे नहीं हैं।

कच्चे तेल की कीमतों का कनेक्शन

इस पूरे अनुमान में कच्चे तेल की कीमतों का अहम रोल है। Emkay Global का मानना है कि अगर तेल की कीमतें गिरकर $75 से $80 प्रति बैरल के बीच स्थिर हो जाती हैं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल की कम कीमतें चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) को कम करने और महंगाई को काबू में रखने में मदद करती हैं। इससे वित्तीय प्रणाली में लिक्विडिटी (Liquidity) भी बढ़ सकती है।

किन सेक्टर्स में दिखेगा दम?

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि अब बाजार में सेक्टर रोटेशन देखने को मिल सकता है। जिन कंपनियों को कम ऊर्जा लागत का फायदा मिलेगा, जैसे कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), ट्रांसपोर्टेशन और सीमेंट कंपनियां, वे अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। कुछ चुनिंदा बैंक भी रिकवरी के दौर में बेहतर कर सकते हैं। वहीं, फार्मा, एफएमसीजी (FMCG) और आईटी (IT) जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स की तुलना में उन साइक्लिकल सेक्टर्स (Cyclical Sectors) में ज्यादा रुचि देखी जा सकती है जो आर्थिक सुधार का सीधा फायदा उठाते हैं।

जोखिम और हकीकत

यह जानना जरूरी है कि इस तरह के अनुमान कुछ जोखिमों के साथ आते हैं। यह पूरा आउटलुक खास तौर पर भू-राजनीतिक स्थिति, जैसे अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित समझौते, पर टिका है। अगर ऐसा कोई समझौता नहीं होता या तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं आएगी, जिससे महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी भी तरह का नुकसान सप्लाई-चेन में बाधा डाल सकता है। ये जोखिम बताते हैं कि बाजार के अनुमान सिर्फ कुछ मान्यताओं पर आधारित होते हैं और असलियत इनसे काफी अलग हो सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आने वाले समय में निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय कंपनियों की कमाई पर कड़ी नजर रखनी होगी। 16% EPS ग्रोथ का अनुमान कितना सच होता है, यह देखना अहम होगा। इसके अलावा, देश के चालू खाता घाटे और महंगाई के आंकड़ों पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही, कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री से यह भी पता चलेगा कि वे लागत दबाव और डिमांड को लेकर क्या कह रही है, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कॉरपोरेट सेक्टर ग्रोथ के अनुमानों पर खरा उतर रहा है या नहीं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.