भारतीय शेयर बाजार में 20 अगस्त 2026 को जोरदार वापसी हुई, जिसमें Nifty 50 ने **153** अंकों की बढ़त के साथ **24,231** पर क्लोजिंग दी। इस रिकवरी ने लगातार सात सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) रही। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के दबाव के चलते निवेशक अभी भी सतर्क हैं।
क्यों लौटी बाज़ार में रौनक?
20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में राहत भरी तेजी देखी गई, जिसने लगातार सात सत्रों से चली आ रही गिरावट पर विराम लगा दिया। Nifty 50 इंडेक्स 153.55 अंक यानी 0.64% चढ़कर 24,231.85 पर बंद हुआ। BSE Sensex भी इस रुझान के साथ चला और 628.04 अंक की बढ़त के साथ 77,537.72 के स्तर पर बंद हुआ। इस रिकवरी ने लगातार बिकवाली के दौर के बाद थोड़ी राहत दी है।
इस उछाल के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेत थे, खासकर अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से बॉन्ड यील्ड को कम करने के प्रयासों से बाज़ार को सहारा मिला। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो आमतौर पर उभरते बाजारों के शेयरों पर दबाव कम होता है। इसके अलावा, घरेलू बाज़ारों में जोरदार शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) देखने को मिली, जिसमें ट्रेडर्स ने अपनी बियरिश पोजीशन को बंद करने के लिए शेयर खरीदे, जिससे दिन की बढ़त में और इज़ाफा हुआ। रियलटी (Realty), आईटी (IT) और फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) जैसे सेक्टर्स में खरीदारी बढ़ी, जिससे रिकवरी ब्रॉड-बेस्ड रही।
टेक्निकल चार्ट्स क्या कहते हैं?
टेक्निकल लिहाज से, Nifty 50 ने 24,188 के अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को फिर से हासिल कर लिया, जो कि एक महत्वपूर्ण ट्रेंड इंडिकेटर है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इंडेक्स अभी भी 20-दिवसीय EMA, जो लगभग 24,300 के करीब है, के नीचे कारोबार कर रहा है। अब 24,290 से 24,320 के बीच तत्काल रेजिस्टेंस (Resistance) देखा जा रहा है, जबकि इंडेक्स 24,100 से 24,130 के बीच सपोर्ट (Support) पर टिका हुआ है।
बाज़ार के सामने चुनौतियाँ?
सेशन की बढ़त के बावजूद, निवेशकों के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें $92 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं, जो महंगाई और भारत की आयात लागत पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव अनिश्चितता पैदा कर रहा है। घरेलू मोर्चे पर, संस्थागत बिकवाली एक बड़ी चिंता बनी हुई है; विदेशी निवेशकों ने 2026 के दौरान रिकॉर्ड मात्रा में भारतीय शेयर बेचे हैं, जिससे बाज़ार पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, PSU बैंक्स (PSU Banks) और केमिकल्स (Chemicals) जैसे सेक्टर्स में सुस्त प्रदर्शन देखा गया, जो बताता है कि रिकवरी बाज़ार के सभी हिस्सों में एक समान नहीं थी।
आगे चलकर, बाज़ार के लिए मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि क्या यह रिकवरी बनी रह सकती है। निवेशक इस पर नज़र रखेंगे कि क्या Nifty 24,300 के रेजिस्टेंस ज़ोन को निर्णायक रूप से पार कर पाता है या फिर यह रेंज-बाउंड कंसॉलिडेशन (Range-bound consolidation) चरण में लौटता है। विदेशी संस्थागत बिकवाली की निरंतरता और वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले सत्रों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु बने रहेंगे।
