गुरुवार को भारतीय शेयर बाजारों में तेजी देखी गई, निफ्टी (Nifty) 24,100 के पार निकल गया। आईटी (IT) शेयरों में जोरदार खरीदारी के चलते यह उछाल आया। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट और जून महीने के ₹1.95 लाख करोड़ के शानदार GST कलेक्शन ने भी बाजार को सहारा दिया। वहीं, Adani Energy Solutions ने ₹10,000 करोड़ जुटाने का ऐलान किया है, भले ही भारतीय रुपया (Indian Rupee) दबाव में बना हुआ है।
बाजार में क्यों आई तेजी?
भारतीय शेयर बाजारों ने गुरुवार को मजबूती दिखाई, जहां निफ्टी इंडेक्स 24,100 के स्तर को पार कर गया। सेंसेक्स (Sensex) भी 77,000 के पार निकल गया। इस तेजी का मुख्य कारण था सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर में शानदार परफॉर्मेंस, जहां निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। बाजार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट और अन्य सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों का भी साथ मिला। तेल की कीमतें कम होने से भारत जैसी तेल आयात करने वाले देशों को फायदा होता है।
IT सेक्टर में निवेशकों की चांदी
आईटी (IT) स्टॉक इस तेजी के सबसे बड़े वाहक रहे। Infosys ने 4% से ज्यादा की छलांग लगाई और ₹1,025.70 पर पहुंच गया। Wipro 3.77% और HCL Technologies 2.77% की बढ़त के साथ चढ़े। जानकारों का मानना है कि आईटी शेयर कुछ समय से बिकवाली के दबाव में थे और अब उनमें नई जान आ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मिली-जुली चाल के बावजूद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत: तेल और GST
बाजार का सेंटिमेंट दो अहम आर्थिक आंकड़ों से और मजबूत हुआ। पहला, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें गिरकर $67–$71 प्रति बैरल के दायरे में आ गई हैं, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
दूसरा, सरकार ने जून महीने के लिए ₹1.95 लाख करोड़ का शानदार GST कलेक्शन पेश किया, जो पिछले साल के मुकाबले 13.9% ज्यादा है। इसमें आयात से जुड़े राजस्व में 34.6% की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों का संकेत है। साथ ही, जून में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 24.1% की ग्रोथ ने भी अर्थव्यवस्था की मजबूत मांग को दिखाया।
Adani Energy का फंडरेज़िंग प्लान
कॉर्पोरेट जगत में, Adani Energy Solutions के बोर्ड ने ₹10,000 करोड़ जुटाने की मंजूरी दी है। निवेशक इस कदम पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, क्षमता बढ़ाने या नए प्रोजेक्ट में निवेश के लिए कैसे करती है।
आगे क्या है चिंता की बात?
बाजार में तेजी के बावजूद, भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है। करेंसी का गिरना विदेशी निवेशकों और बाहरी कर्ज वाली कंपनियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। यह देखना होगा कि क्या यह दबाव बना रहता है या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इसे स्थिर करने के लिए कदम उठाता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले दिनों में निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि किसी भी अचानक उछाल से महंगाई की चिंता फिर बढ़ सकती है। आईटी सेक्टर में तेजी कितनी टिकाऊ है और Adani Energy Solutions के फंडरेज़िंग प्लान की समय-सीमा और तरीके पर कोई नई घोषणाएं भी महत्वपूर्ण होंगी। इसके अलावा, रुपये का प्रदर्शन बाजार की स्थिरता के लिए एक अहम कारक बना रहेगा।
