गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार रिकवरी देखने को मिली, Nifty 50 ने 183 अंकों की छलांग लगाते हुए 24,000 का लेवल फिर से हासिल कर लिया। मिडकैप इंडेक्स ने बाज़ार का नेतृत्व किया, हालांकि Dr. Reddy’s Laboratories के शेयरों में करीब 5% की गिरावट देखी गई।
शेयर बाज़ारों में जोरदार वापसी
गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में ज़बरदस्त रिकवरी आई। Nifty 50 दिन के अंत में 183.10 अंकों की बढ़त के साथ 24,065.15 पर बंद हुआ। वहीं, Sensex में भी 551.19 अंकों की तेज़ी दर्ज की गई और यह 77,054.79 पर बंद हुआ। इस उछाल ने पिछले सत्र के नुकसान की भरपाई कर दी और बाज़ार में रिस्क लेने की निवेशकों की क्षमता का संकेत दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप का कमाल
रिकवरी में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने सबसे ज़्यादा दम दिखाया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 1.48% चढ़ा, जबकि Nifty Small Cap 100 इंडेक्स 1.70% की मजबूती के साथ आगे बढ़ा। BSE पर 94 शेयरों ने अपने 52-हफ्ते के नए हाई बनाए, जबकि सिर्फ 60 शेयर नए लो पर पहुंचे। इससे पता चलता है कि साप्ताहिक एक्सपायरी की वोलैटिलिटी के बावजूद, बाज़ार के विभिन्न हिस्सों में खरीदारी का रुझान बना रहा।
Dr. Reddy’s Laboratories पर बिकवाली का दबाव
फार्मा सेक्टर में आम तौर पर सकारात्मक रुझान रहा, लेकिन Dr. Reddy’s Laboratories का शेयर इससे अलग दिखा। यह शेयर 5.31% लुढ़क गया और इसमें भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम देखने को मिला। यह गिरावट तब हुई जब Sun Pharmaceutical जैसे अन्य प्रमुख फार्मा शेयरों में 2.50% तक की बढ़त दर्ज की गई। भारी वॉल्यूम के साथ शेयर में गिरावट अक्सर बड़े निवेशकों द्वारा बिकवाली का संकेत देती है, हालांकि कंपनी की ओर से इस बारे में कोई विशेष घोषणा नहीं की गई है।
बाज़ार की चाल पर असर डालने वाले फैक्टर
कई मैक्रोइकॉनॉमिक्स और भू-राजनीतिक कारक बाज़ार की गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर, ऊर्जा बाज़ारों को संवेदनशील बनाए हुए है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से ईंधन पर निर्भर सेक्टरों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब ₹95.5 के स्तर पर बना हुआ है, जो विदेशी निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
आगे चलकर, बाज़ार की नज़रें आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। IT सेक्टर के शेयर, जैसे Infosys, पहले से ही बिकवाली के दबाव में हैं, आज 1.34% गिरे। निवेशक आने वाले हफ्तों में रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन पर कंपनी के गाइडेंस का इंतज़ार करेंगे ताकि यह तय किया जा सके कि मौजूदा रिकवरी कितनी टिकाऊ है। नज़दीकी अवधि के लिए मुख्य निगरानी योग्य बातों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) का नेट फ्लो डेटा और रुपये की चाल का आयात-भारी उद्योगों पर असर शामिल है।
