3 अगस्त, 2026 को Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। तिमाही नतीजों में आई मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इस तेजी के मुख्य कारण रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप की तूफानी तेजी!
भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते की शानदार शुरुआत की है, जहाँ Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स इंट्रा-डे रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। यह तेजी सिर्फ लार्ज-कैप शेयरों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों का फोकस मिड-साइज़्ड कंपनियों पर भी बढ़ा है। बाजार में कुल मिलाकर 1% का उछाल देखा गया, जिसे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों के स्थिर फ्लो ने सहारा दिया।
नतीजों का असर और सेक्टर परफॉरमेंस
बाजार में हालिया तिमाही नतीजों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। मिडकैप शेयरों में, Aditya Birla Capital, Jubilant FoodWorks, और KPIT Technologies जैसे स्टॉक्स में 3% से 5% तक की बढ़त दर्ज की गई। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियों के अच्छे नतीजों के कारण यह तेजी और बढ़ सकती है।
स्मॉलकैप सेगमेंट में भी शानदार प्रदर्शन देखा गया। Urban Company के शेयर नतीजों के बाद 17% तक उछल गए। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 43.85% बढ़ा, और नेट लॉस भी कम हुआ। Pine Labs और Reliance Power जैसे स्टॉक्स में भी 3% से 6% की तेजी आई।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स
Brent क्रूड ऑयल की कीमतें गिरकर लगभग $84 प्रति बैरल पर आ गई हैं, जिससे भारतीय बाजार को फायदा हुआ है। कम तेल कीमतों से महंगाई पर लगाम लगने और रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली में भी काफी कमी आई है। जुलाई में FIIs ने लगभग ₹6,000 करोड़ की बिकवाली की, जो पिछले 6 महीनों के औसत ₹57,000 करोड़ से काफी कम है।
घरेलू क्रेडिट ग्रोथ 18% से ऊपर बनी हुई है और ऑटो सेल्स में भी मजबूती है। इन सबका असर यह है कि 2025 के स्टिमुलस मेजर्स का फायदा इकोनॉमी को मिल रहा है। Q1 के कॉर्पोरेट नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे FY27 तक अर्निंग ग्रोथ की संभावना बढ़ गई है।
आगे क्या?
फिलहाल बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव है, लेकिन आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि तिमाही नतीजों में यह ग्रोथ सभी सेक्टर्स में बनी रहती है या नहीं। निवेशक क्रूड ऑयल की कीमतों और FIIs के निवेश पैटर्न पर भी नजर रखेंगे। Urban Company जैसी कंपनियों के लिए, यह देखना होगा कि वे रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती हैं।
