भारतीय शेयर बाज़ार 13 जुलाई, 2026 को मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। दिन भर की भारी उठापटक के बाद सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट रहे, लेकिन IT सेक्टर में TCS और HCLTech जैसी कंपनियों के दम पर **3.59%** की जोरदार तेजी देखने को मिली। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर दिख रहा है, जो आज एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर रहा।
IT सेक्टर का जलवा
बाजार में आज सबसे बड़ा आकर्षण IT सेक्टर रहा। Nifty IT इंडेक्स में करीब 3.59% का उछाल देखा गया, जो लगातार दूसरा दिन है जब इस सेक्टर ने बढ़त दर्ज की है। Tata Consultancy Services (TCS) और HCLTech में जबरदस्त खरीदारी हुई। IT इंडेक्स के सभी शेयर हरे निशान में बंद हुए, जो बाजार की अनिश्चितता के बावजूद इस सेगमेंट में निवेशकों का भरोसा दिखाता है।
अन्य सेक्टर्स का हाल
IT के अलावा, दूसरे सेक्टर्स में मिली-जुली तस्वीर दिखी। Nifty मेटल इंडेक्स करीब 0.7% लुढ़क गया, जिसका मुख्य कारण Tata Steel और Jindal Steel जैसी कंपनियों में गिरावट रही। फार्मा सेक्टर भी थोड़ा कमजोर रहा, Nifty फार्मा इंडेक्स लगभग 0.15% नीचे आया, PPL Pharma और Alkem Laboratories जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत, Nifty बैंक इंडेक्स लगातार तीसरे दिन तेजी के साथ बंद हुआ। Union Bank of India और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयरों ने HDFC Bank और AU Small Finance Bank में हुई गिरावट को कुछ हद तक संभाला। मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट भी लगभग सपाट से सकारात्मक रुख बनाए रखने में कामयाब रहे, जिसमें Kalyan Jewelers, Voltas, Pine Labs, और Zensar Technologies जैसी कंपनियों ने मजबूती दिखाई।
रुपए पर दबाव और मैक्रो इकोनॉमिक चिंताएं
शेयरों के प्रदर्शन के अलावा, करेंसी मार्केट में दबाव साफ दिखा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए इन कीमतों का सीधा असर रुपये की स्थिरता पर पड़ता है। HDFC Securities के विश्लेषकों का कहना है कि रुपया फिलहाल अपने एशियाई साथियों में सबसे कमजोर है, और आने वाले सत्रों में USDINR की जोड़ी 94.90 और 96.00 के बीच कारोबार कर सकती है।
निवेशक अब IT शेयरों की इस तेजी की स्थिरता और बैंकिंग सेक्टर के मौजूदा रुझान को बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे। साथ ही, मुद्रास्फीति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे। आने वाले तिमाही नतीजों और सेंट्रल बैंक की ओर से मुद्रा को लेकर किसी भी नई टिप्पणी पर ध्यान देना बाजार की दिशा समझने के लिए ज़रूरी होगा।
