Nifty IT Funds: 18.6% की तेज़ी के बावजूद ₹280 करोड़ का Outflow!

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty IT Funds: 18.6% की तेज़ी के बावजूद ₹280 करोड़ का Outflow!

Nifty IT इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स से जुलाई में ₹280 करोड़ का नेट आउटफ्लो देखा गया, जबकि इस सेक्टर ने पिछले 6 सालों की सबसे बड़ी मंथली गेन दर्ज की। ऐसा लगता है कि निवेशक इस रिकवरी का इस्तेमाल प्रॉफिट बुकिंग या अपनी पुरानी पोजीशन से निकलने के लिए कर रहे हैं, जो कि टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया उछाल के बावजूद सावधानी का संकेत है।

Nifty IT Funds में क्यों हुआ Outflow?

Nifty IT इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स में जुलाई के दौरान निवेशकों के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां इस सेक्टर ने पिछले 6 सालों का सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 18.6% की मंथली गेन दर्ज की, वहीं फंड्स से करीब ₹280 करोड़ बाहर निकल गए। यह ट्रेंड पिछले साल के बिल्कुल उलट है, जब सेक्टर में गिरावट के बावजूद इन फंड्स में लगातार पैसा आ रहा था।

AUM में बढ़ोतरी, पर इंडेक्स से कम

इंडेक्स में आई इस तेज़ी के कारण इन पैसिव फंड्स की टोटल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब ₹6,600 करोड़ हो गई। हालांकि, यह बढ़ोतरी इंडेक्स की 13.8% की असल गेन से कम रही, जो बताता है कि निवेशकों की बिकवाली ने एसेट्स वैल्यू में पूरी बढ़ोतरी को सीमित कर दिया। कई निवेशक, जो जून तक चले सेक्टर की गिरावट के दौरान भी बने हुए थे, उन्होंने हालिया प्राइस जम्प का फायदा उठाकर अपनी हिस्सेदारी कम की या मुनाफा बुक किया।

IT सेक्टर में रिकवरी के कारण

जुलाई में IT सेक्टर की रिकवरी की मुख्य वजह फर्स्ट क्वार्टर के नतीजों का उम्मीद से बेहतर आना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पहले का अत्यधिक उत्साह कम होना रहा। AI के पारंपरिक IT सर्विसेस पर पड़ने वाले तत्काल प्रभाव के डर के कम होने के साथ ही, निवेशकों ने डोमेस्टिक टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर फिर से ध्यान देना शुरू किया। पिछले एक मुश्किल साल के बाद कई लार्ज-कैप IT कंपनियों की वैल्यूएशन कई सालों के निचले स्तर पर आ गई थी, जिससे ये स्टॉक्स वैल्यू इन्वेस्टर्स के लिए आकर्षक लग रहे थे।

इंडस्ट्री की चुनौतियां बरकरार

हालिया पॉजिटिव मोमेंटम के बावजूद, इंडस्ट्री का ओवरआल आउटलुक सतर्क बना हुआ है। डोमेस्टिक और ग्लोबल IT कंपनियां लगातार मामूली रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग को लेकर अनिश्चितता को दर्शाता है। कई एसेट मैनेजर्स का इस सेक्टर पर नज़रिया कंज़र्वेटिव है, क्योंकि दोहरे अंकों की ग्रोथ कब लौटेगी, इसकी विजिबिलिटी अभी भी कम है। जुलाई की रैली में कैपिटल के ग्लोबल रोटेशन का भी असर था, क्योंकि निवेशक सेमीकंडक्टर-हैवी AI ट्रेड्स से हटकर पारंपरिक सॉफ्टवेयर और सर्विसेस फर्म्स की ओर बढ़ रहे थे।

आने वाले महीनों में, निवेशकों के लिए मुख्य रूप से ग्लोबल क्लाइंट्स की ओर से डिस्क्रिशनरी टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग में असल रिकवरी पर नज़र रखनी होगी। हाल की अर्निंग्स ने उम्मीदों पर खरा उतरकर कुछ राहत दी है, लेकिन भविष्य की तिमाही नतीजों में लगातार ग्रोथ बनाए रखने में रुचि बनी रहेगी। अगर इंडेक्स में वोलेटिलिटी बनी रहती है या वैल्यूएशन को सपोर्ट करने के लिए नई इंस्टीट्यूशनल इंटरेस्ट उभरती है, तो प्रॉफिट-टेकिंग का ट्रेंड जारी रहेगा या नहीं, इस पर भी मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.