आईटी सेक्टर में टेक्निकल गड़बड़ी
IT सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई इस गिरावट से मार्केट स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव आया है। ऐसा लग रहा है कि संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) सॉफ्टवेयर सर्विसेज से पैसा निकालकर कहीं और लगा रहे हैं। Lenskart Technology और Tata Consultancy Services (TCS) ने 30-दिन, 50-दिन, 150-दिन और 200-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (Simple Moving Average) को तोड़ दिया है, जिससे ये स्टॉक्स अब मुश्किल टेक्निकल ज़ोन में आ गए हैं। जब एक साथ इतनी बड़ी कंपनियों के शेयर इन सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे गिर जाते हैं, तो यह अक्सर किसी बड़ी बिकवाली (Exit Strategy) का संकेत होता है। पिछले तीन दिनों में Nifty IT इंडेक्स करीब 8% भागा था, लेकिन आज की 3.5% की गिरावट ने उस तेज़ी को लगभग खत्म कर दिया है।
सेक्टर में बिखराव, मार्केट में अलग रुझान
जहां IT सेक्टर में तेज़ी रुक गई है, वहीं बाकी मार्केट में हाई-बीटा (High-Beta) वाले स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेशकों का खूब इंटरेस्ट दिख रहा है। ATLPP और Epack Prefab Technologies जैसे स्टॉक्स में आई तेज़ी दिखाती है कि निवेशक वैल्यू-सेंसिटिव IT स्टॉक्स से निकलकर उन स्टॉक्स की ओर जा रहे हैं, जिनमें अपनी अलग मोमेंटम (Momentum) है। Venus Remedies और IZMO जैसे कई स्मॉल-कैप स्टॉक्स का अपर सर्किट (Upper Circuit) पर पहुंचना, IT इंडेक्स की गिरावट के साथ-साथ हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक इंडेक्स के मूवमेंट पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि अलग-अलग स्टॉक्स की टेक्निकल स्ट्रेंथ पर दांव लगा रहे हैं, जिन्होंने अपने 30-दिन और 50-दिन के ट्रेंड लाइन्स को पकड़े रखा है।
मंदी के संकेत?
IT सेक्टर में मौजूदा चाल, एक मजबूत रिकवरी की कहानी पर सवाल खड़ा करती है। इतनी तेज़ी से मुनाफा वसूली (Profit-Taking) इस बात का इशारा है कि यह तेज़ी सिर्फ लिक्विडिटी (Liquidity) की वजह से थी, न कि ऑर्डर बुक (Order Books) या मार्जिन ग्रोथ (Margin Growth) में किसी बड़े सुधार की वजह से। TCS जैसी कंपनियों के लिए लंबे समय के मूविंग एवरेज को डिफेंड करने में नाकामयाबी, एल्गोरिद्मिक सेलिंग (Algorithmic Selling) को न्योता दे सकती है, जिससे गिरावट और बढ़ सकती है। इसके अलावा, ग्लोबल IT खर्चों में कमी और मार्जिन पर बढ़ती जांच जैसी बड़ी दिक्कतें भी नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकतीं। स्मॉल-कैप्स के विपरीत, इन बड़ी IT कंपनियों को ऊंची ब्याज दरों (Higher Interest Rates) का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) को कम करता है और डिविडेंड यील्ड (Dividend Yields) के आकर्षण को घटाता है।
आगे क्या?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) अब 150-दिन और 200-दिन के मूविंग एवरेज पर IT सेक्टर की नज़र रखेंगे कि यह टेक्निकल ब्रेकडाउन सिर्फ एक छोटी सी रुकावट है या एक बड़ी मंदी की शुरुआत। अगर IT सेक्टर अगले कुछ दिनों में इन लेवल्स से ऊपर नहीं लौट पाता है, तो एक लंबी कंसोलिडेशन (Consolidation) या मंदी के फेज की संभावना बढ़ जाएगी। वहीं, स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेशकों का पैसा लगता रहेगा, हालांकि ऐसे मोमेंटम वाले गेन्स (Momentum Gains) में अचानक गिरावट का खतरा हमेशा बना रहता है, खासकर अगर मार्केट में वोलेटिलिटी (Volatility) बढ़ती है।
