भारतीय शेयर बाजार ने 25 अगस्त 2026 को मजबूती दिखाई। Nifty 50 इंडेक्स **0.48%** चढ़कर **24,334.55** पर बंद हुआ, 24,300 के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखी। वहीं, मासिक F&O एक्सपायरी के चलते Bank Nifty सपाट रहा।
बाजार में दिखी रिकवरी, Nifty ने पकड़ी रफ्तार
25 अगस्त 2026 को भारतीय इक्विटी मार्केट ने अच्छी रिकवरी दर्ज की। Nifty 50 इंडेक्स 115.50 अंकों की बढ़त के साथ 24,334.55 पर बंद हुआ। इंडेक्स ने 24,300 के अहम स्तर को सफलतापूर्वक बनाए रखा, भले ही दिनभर उतार-चढ़ाव देखा गया। यह स्थिरता मासिक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी के समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इस दौरान ट्रेडर्स के पोजीशन क्लोज करने से शेयरों की कीमतों में अचानक बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
Bank Nifty की चाल धीमी
जहां Nifty ने मजबूती दिखाई, वहीं Bank Nifty इंडेक्स को स्पष्ट दिशा नहीं मिल पाई। यह 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 57,514.20 पर बंद हुआ, जो कि कंसॉलिडेशन (consolidation) का संकेत देता है। बैंकिंग सेक्टर, जो अक्सर बाजार की बड़ी चालों को दिशा देता है, इस दौरान सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, क्योंकि ट्रेडर्स वैश्विक और घरेलू संकेतों का आकलन कर रहे थे।
बाजार की चाल और वैश्विक संकेत
दिन के कारोबार पर घरेलू कारकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खबरों का भी असर रहा। निवेशक खासकर भू-राजनीतिक विकास, विशेष रूप से ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर सतर्क थे। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की चिंता बढ़ी है। ऊर्जा की ऊंची लागत महंगाई पर दबाव डाल सकती है और उन भारतीय कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है जो उत्पादन और लॉजिस्टिक्स के लिए ईंधन पर निर्भर हैं। इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का फ्लो एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना रहा, जबकि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50–96.00 के करीब कारोबार कर रहा था।
ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण स्तर
Nifty 50 के लिए, 24,300 के स्तर को बनाए रखना मुख्य फोकस रहेगा। यदि इंडेक्स इस सपोर्ट को बनाए रखता है, तो ट्रेडर्स 24,500 के स्तर को अगले संभावित रेजिस्टेंस (resistance) के रूप में देख सकते हैं। नीचे की ओर, 24,000 से 24,200 का रेंज इंडेक्स के लिए एक महत्वपूर्ण कुशन का काम करेगा। विश्लेषक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या मौजूदा तेजी मासिक कॉन्ट्रैक्ट के अंत तक बनी रह सकती है।
Bank Nifty के लिए, 50-दिनों का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के रूप में कार्य कर रहा है, विशेष रूप से 57,250 से 57,300 के आसपास। इस क्षेत्र से नीचे की गिरावट कमजोरी का संकेत दे सकती है, जबकि 57,500 के ऊपर की चाल एक स्पष्ट अपट्रेंड के लिए आवश्यक होगी।
निवेशक वैश्विक बाजार के प्रदर्शन, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और FIIs के सेंटिमेंट में किसी भी बदलाव पर नजर रखना जारी रख सकते हैं, क्योंकि ये कारक एक्सपायरी सप्ताह के बाकी दिनों में बाजार की अल्पकालिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
