Nifty Futures: RBI की पॉलिसी के बाद 24,750 का रेजिस्टेंस टेस्ट, क्या बढ़ेगा बाजार?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty Futures: RBI की पॉलिसी के बाद 24,750 का रेजिस्टेंस टेस्ट, क्या बढ़ेगा बाजार?

भारतीय शेयर बाजार का मुख्य सूचकांक Nifty 50, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ताजा पॉलिसी के बाद करीब **24,625** के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निवेशकों की नजरें **24,750** के अहम रेजिस्टेंस लेवल पर टिकी हैं, जो बार-बार बाजार की बढ़त को रोक रहा है। सेंट्रल बैंक द्वारा रेपो रेट स्थिर रखने के फैसले के बाद बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए है।

Nifty 50 की चाल:

6 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में Nifty 50 की चाल सीमित दायरे में रही और यह 24,625 के स्तर के आसपास बना रहा। ट्रेडर्स की नजरें 24,750 के लेवल पर हैं, जो फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए एक मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) साबित हो रहा है। अगर यह लेवल पार होता है तो बाजार की मौजूदा तकनीकी संरचना (Technical Structure) बदल सकती है, लेकिन अगर इंडेक्स इसे तोड़ने में नाकाम रहता है, तो यह अपने हालिया ट्रेडिंग रेंज में ही फंसा रह सकता है।

RBI की पॉलिसी का असर:

बाजार का मौजूदा सेंटिमेंट 5 अगस्त 2026 को आए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के नतीजे से प्रभावित है। सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और अपनी न्यूट्रल (Neutral) पॉलिसी स्टैंस को जारी रखा है। इस फैसले से बाजार को कुछ हद तक स्पष्टता मिली है, हालांकि निवेशक ग्लोबल संकेतों (Global Cues) और मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Macroeconomic Indicators) के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।

सेक्टर परफॉर्मेंस और स्टॉक्स:

सेक्टर्स में मिली-जुली तस्वीर देखने को मिल रही है। Nifty Healthcare और Nifty Pharma जैसे इंडेक्स में पॉजिटिव मोमेंटम (Positive Momentum) देखा गया, वहीं Nifty Media और Nifty IT में बिकवाली का दबाव रहा। ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) के इंडिकेटर्स भी सावधानी बरतने का संकेत दे रहे हैं, क्योंकि शुरुआती ट्रेडिंग घंटों में एडवांस्ड-डिक्लाइन रेशियो (Advance-Decline Ratio) बियरिश साइड (Bearish Side) की ओर झुका हुआ था। अलग-अलग स्टॉक्स में भी हलचल दिखी, जिसमें Shriram Finance सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में से एक रहा, जबकि Power Grid और Trent में गिरावट दर्ज की गई।

रेगुलेटरी बदलाव और आगे का आउटलुक:

मार्केट रेगुलेशन (Market Regulation) भी एक अहम फैक्टर है जिस पर फिलहाल नजर रखी जा रही है। 3 अगस्त 2026 से F&O-एलिजिबल स्टॉक्स (F&O-eligible stocks) के लिए नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session - CAS) के लागू होने के बाद, ट्रेडर्स दिन के अंत में प्राइस डिस्कवरी के नए तरीकों के अभ्यस्त हो रहे हैं। इस रेगुलेटरी बदलाव के इंट्राडे वोलैटिलिटी (Intraday Volatility) और लिक्विडिटी (Liquidity) पर पड़ने वाले असर पर करीब से नजर रखी जा रही है।

Nifty फ्यूचर्स का आगे का रास्ता ग्लोबल फैक्टर्स, खासकर मिडिल ईस्ट (Middle East) में भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitical Developments) और कच्चे तेल की कीमतों पर उनके संभावित असर से जुड़ा हुआ है। अगर इंडेक्स 24,750 के रेजिस्टेंस को बनाए रखने में विफल रहता है, तो विश्लेषक 24,400 से 24,500 के इमीडिएट सपोर्ट लेवल्स (Immediate Support Levels) का संकेत देते हैं। निवेशकों द्वारा ग्लोबल मार्केट की स्थिरता या घरेलू आर्थिक अपडेट्स के कारण ब्रेकआउट (Breakout) की उम्मीद पर इंडेक्स की चाल पर नजर रखी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.