5 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में ज़्यादा हलचल नहीं दिखी, क्योंकि RBI ने अपना रेपो रेट **5.25%** पर बरकरार रखा। हालाँकि सेंट्रल बैंक ने GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव ने बाज़ार को बढ़ने से रोका। Nifty लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि Bank Nifty में गिरावट आई। ट्रेडर्स अब **24,350** और **24,400** के अहम सपोर्ट लेवल्स पर नज़रें बनाए हुए हैं।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का असर
5 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में निवेशकों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नवीनतम मॉनेटरी पॉलिसी फैसले का सावधानी से आकलन किया। Nifty 50 दिन के अंत में 24,624.65 पर लगभग सपाट बंद हुआ, जिसमें केवल 9.75 अंकों का मामूली इजाफा दर्ज किया गया। वहीं, Bank Nifty 0.29% गिरकर 57,739.95 पर बंद हुआ। BSE Sensex में 152.05 अंकों की मामूली बढ़त देखी गई और यह 78,581.00 पर बंद हुआ।
रेपो रेट और GDP ग्रोथ पर अपडेट
मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया और न्यूट्रल स्टैंड को बरकरार रखा। यह फैसला काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप था। लंबी अवधि के सेंटीमेंट को बढ़ावा देते हुए, सेंट्रल बैंक ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया और महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया। इन सकारात्मक आर्थिक अपडेट्स के बावजूद, बाज़ार दिन भर रेंज-बाउंड रहा।
Nifty और Bank Nifty के चार्ट्स पर क्या दिख रहा है?
चार्ट्स पर, Nifty 50 को 24,750 से 24,800 ज़ोन में मजबूत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। अगर इंडेक्स इस बाधा को पार करने में विफल रहता है, तो ट्रेडर्स 24,350 से 24,400 के क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के रूप में देख रहे हैं। इस सपोर्ट के नीचे किसी भी गिरावट से मौजूदा मोमेंटम में बदलाव का संकेत मिल सकता है। Bank Nifty ने भी अनिश्चितता के संकेत दिखाए और पूरे सत्र में बढ़त बनाए रखने के लिए संघर्ष किया।
बाज़ार पर बाहरी दबाव
बाज़ार की ऊपरी चाल को बाहरी दबावों ने भी सीमित किया। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चिंताएं, कच्चे तेल की कीमतों को $80 प्रति बैरल के करीब ले गईं। इससे संभावित सप्लाई बाधाओं और भविष्य में महंगाई के जोखिमों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, बाज़ार नए पेश किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session) मैकेनिज्म के साथ तालमेल बिठा रहा है, जिसने ट्रेड के अंतिम मिनटों में कुछ अस्थिरता और मूल्य उतार-चढ़ाव पैदा किया है।
निवेशक अब वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों की आगे की चाल पर नज़र रखेंगे कि क्या इंडेक्स अपने सपोर्ट लेवल्स को बनाए रख पाता है। व्यापक बाज़ार का प्रदर्शन, जिसमें मेटल और ऑटो सेक्टरों में बढ़त देखी गई, एक प्रमुख फोकस बना हुआ है कि क्या सेक्टर रोटेशन मुख्य सूचकांकों को आगे बढ़ा सकता है।
