12 अगस्त को भारतीय शेयर बाज़ार में मिली-जुली चाल देखने को मिली। Nifty 50 जहाँ टाटा ग्रुप के शेयरों में बिकवाली के चलते हल्के नुकसान में बंद हुआ, वहीं Bank Nifty ने बढ़त दर्ज की।
बाज़ार में दिखी गिरावट, Nifty 50 का प्रदर्शन
12 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार ने मिले-जुले संकेत दिए। Nifty 50 इंडेक्स दिन के कारोबार के अंत में 35.75 अंक यानी 0.15% की गिरावट के साथ 24,435.95 पर बंद हुआ। इस गिरावट की मुख्य वजह टाटा ग्रुप की कंपनियों में हुई भारी बिकवाली रही, जिसने पूरे बाज़ार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया।
टाटा ग्रुप के शेयरों पर दबाव
बाज़ार में आई इस कमजोरी का कारण टाटा ग्रुप की लीडरशिप से जुड़ी खबरें थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। इस खबर से ग्रुप की कंपनियों में अनिश्चितता का माहौल बना और शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई। खासकर, आईटी दिग्गज TCS के शेयर में दिन के दौरान लगभग 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई। Nifty 50 में आईटी सेक्टर का बड़ा वेटेज होने के कारण TCS की गिरावट ने इंडेक्स को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई।
Bank Nifty ने संभाला मोर्चा
जहां एक ओर Nifty 50 में दबाव देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर Bank Nifty इंडेक्स ने बाज़ार को सहारा दिया। इंट्राडे में गिरावट के बाद Bank Nifty ने वापसी की और 0.77% की बढ़त के साथ 57,885.85 पर बंद हुआ। यह तेज़ी बैंकिंग सेक्टर में खरीदारी की मजबूत मांग को दर्शाती है, जिसने व्यापक बाज़ार में नुकसान को सीमित करने में मदद की। बाज़ार की वोलैटिलिटी (Volatility) भी कम रही, इंडिया VIX 11.67 पर बंद हुआ, जो किसी बड़े पैनिक (Panic) की ओर इशारा नहीं कर रहा था।
आगे की राह और मैक्रो कंसर्न
निवेशकों की नज़रें अब Nifty 50 के लिए 24,250–24,200 के सपोर्ट ज़ोन पर टिकी हैं। टेक्निकल एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर Nifty इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, Brent क्रूड ऑयल की कीमतें $89–90 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। बढ़ती तेल की कीमतें आयात लागत बढ़ाती हैं और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं।
आने वाले सत्रों में, बाज़ार यह देखेगा कि टाटा ग्रुप के शेयर कैसे स्थिर होते हैं और क्या Nifty 50 अपने मौजूदा सपोर्ट स्तरों को बनाए रख पाता है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों के रुझान और आने वाले आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
