भारतीय शेयर बाजार में 22 जून को शानदार रिकवरी देखने को मिली। निफ्टी (Nifty) **24,102** के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के IPO की खबरों ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, इस तेजी के बावजूद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर **94.68** पर आ गया, और FMCG शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
क्या हुआ बाजार में?
22 जून को भारतीय शेयर बाजारों में पिछले हफ्ते की गिरावट का सिलसिला थम गया और बाजार में रिकवरी आई। निफ्टी 50 ट्रेडिंग सेशन के अंत में 89.80 अंक यानी 0.37% की बढ़त के साथ 24,102.90 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स (Sensex) में भी 291.17 अंक की तेजी दर्ज की गई और यह 77,094.07 पर बंद हुआ। ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स भी मजबूत दिखे, निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 0.3% और 0.6% की बढ़त रही। इस रिकवरी की मुख्य वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रही, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरों के बाद देखी गई। साथ ही, हैवीवेट शेयरों में सकारात्मक मोमेंटम भी रहा।
Reliance और बाजार की तेजी
Reliance Industries ने दिन की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। कंपनी के शेयर में तेजी देखी गई, क्योंकि इसकी सब्सिडियरी Jio Platforms ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया है। बाजार के प्रतिभागियों के लिए यह कदम कंपनी की कैपिटल एलोकेशन रणनीति में एक महत्वपूर्ण विकास का संकेत है। भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक होने के नाते, Reliance के शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव का निफ्टी और सेंसेक्स इंडेक्स पर बड़ा असर पड़ता है।
फार्मा चमका, FMCG फिसला
सेक्टर परफॉर्मेंस में स्पष्ट अंतर दिखा। निफ्टी फार्मा इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें Cipla, Dr. Reddy's Laboratories और Sun Pharma जैसे शेयरों ने बढ़त दर्ज की। यह हेल्थकेयर और फार्मा स्टॉक्स में फिर से दिलचस्पी का संकेत देता है। वहीं, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। Nestle India, Asian Paints और Titan Company जैसे शेयर प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल थे। यह रोटेशन बताता है कि निवेशक कंजम्पशन-ओरिएंटेड सेक्टरों में मुनाफावसूली कर रहे हैं और बाजार के दूसरे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
करेंसी पर दबाव
इक्विटी बाजारों में जहां तेजी रही, वहीं करेंसी मार्केट में कमजोरी दिखी। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर हुआ और 94.68 पर बंद हुआ। कमजोर रुपया आमतौर पर उन कंपनियों पर दबाव डालता है जो आयात पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं या जिनके पास विदेशी मुद्रा ऋण है। यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, क्योंकि करेंसी की अस्थिरता ऑयल मार्केटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे सेक्टरों के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, निवेशक कुछ तकनीकी और फंडामेंटल कारकों पर बारीकी से नजर रख सकते हैं। निफ्टी के लिए 24,200–24,230 रेंज में रेजिस्टेंस है, और इस स्तर से ऊपर बने रहने की इंडेक्स की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। डाउनसाइड सपोर्ट 23,950 के करीब है। तकनीकी स्तरों के अलावा, कच्चे तेल की कीमतों का रुख घरेलू सेंटीमेंट के लिए एक प्रमुख मैक्रो ड्राइवर बना रहेगा। इसके अतिरिक्त, Jio Platforms IPO प्रक्रिया की प्रगति, जिसमें नियामक अनुमोदन और समय-सीमा शामिल है, Reliance Industries के शेयरधारकों के लिए एक प्रमुख निगरानी योग्य बिंदु होगी।
