Nifty 500 बनेगा भारत का मुख्य इंडेक्स? Mirae Asset CEO ने बताई वजह, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nifty 500 बनेगा भारत का मुख्य इंडेक्स? Mirae Asset CEO ने बताई वजह, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

Mirae Asset Investment Managers (India) के CEO, स्वरूप मोहंती का मानना है कि आने वाले समय में Nifty 500, भारतीय निवेशकों के लिए बाजार का मुख्य पैमाना बन सकता है, और Nifty 50 की जगह ले सकता है। यह बदलाव अर्थव्यवस्था और निवेशकों के आधार के बढ़ने के साथ व्यापक बाजार में निवेश की ओर इशारा करता है। हालांकि, इससे जहां ज़्यादा डाइवर्सिफिकेशन मिलेगा, वहीं Nifty 50 की तुलना में ज़्यादा अस्थिरता (Volatility) और लिक्विडिटी (Liquidity) के जोखिम भी बढ़ सकते हैं।

Mirae Asset Investment Managers (India) के वाइस चेयरमैन और CEO, स्वरूप मोहंती ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर एक अहम भविष्यवाणी की है। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में Nifty 500, भारतीय निवेशकों के लिए बाजार को मापने का मुख्य जरिया बन सकता है, और यह Nifty 50 से आगे निकल सकता है।

Nifty 500 क्यों बन सकता है मुख्य इंडेक्स?

इस नजरिए के पीछे की मुख्य वजह भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती प्रकृति है। Nifty 50 इंडेक्स में केवल भारत की टॉप 50 सबसे बड़ी और स्थापित कंपनियां शामिल होती हैं। इसके विपरीत, Nifty 500 में 500 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें लार्ज-कैप (Large-cap), मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) फर्मों का मिश्रण है। चूंकि Nifty 500 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर फ्री-फ्लोट मार्केट वैल्यू का लगभग 92% प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह देश की आर्थिक सेहत का ज़्यादा संपूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।

पैसिव इन्वेस्टिंग और युवा निवेशक

पिछले 6 सालों में पैसिव इन्वेस्टिंग (Passive Investing) में काफी तेजी आई है, जिसमें फंड मैनेजर इंडेक्स को मात देने की कोशिश करने के बजाय सिर्फ उसे ट्रैक करते हैं। ऐसे फोलियो की संख्या कुल इंडस्ट्री फोलियो का लगभग 16-17% हो गई है। मोहंती का कहना है कि भारत की युवा पीढ़ी, जिसमें 2026 तक 30 साल से कम उम्र के निवेशकों का बड़ा हिस्सा होने का अनुमान है, केवल टॉप 50 कंपनियों से आगे बढ़कर ज़्यादा डाइवर्सिफाइड (Diversified) निवेश विकल्पों की तलाश कर रही है। यह जनसांख्यिकी (Demographic) अक्सर ऐसे प्रोडक्ट्स पसंद करती है जो Nifty 500 की संरचना के साथ बेहतर तालमेल बिठाते हैं।

निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें

Nifty 500 जैसे व्यापक इंडेक्स पर शिफ्ट होने पर निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जहां यह ज़्यादा एक्सपोजर (Exposure) प्रदान करता है, वहीं इसमें कई मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक भी शामिल हैं। ये स्टॉक Nifty 50 की लार्ज-कैप कंपनियों की तुलना में काफी ज़्यादा वोलेटाइल (Volatile) हो सकते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान, छोटी कंपनियां अक्सर तेज़ी से गिरती हैं और कम लिक्विडिटी (Liquidity) के कारण जल्दी ट्रेड करना मुश्किल हो सकता है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) है। Nifty 500 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड या ईटीएफ (ETFs) में निवेश करते समय, फंड का प्रदर्शन इंडेक्स के प्रदर्शन से बिल्कुल मेल नहीं खा सकता है। इस अंतर को ट्रैकिंग एरर कहा जाता है, और यह Nifty 50 की तुलना में व्यापक इंडेक्स में अधिक हो सकता है।

निवेशकों को यह भी देखना होगा कि उनके निवेश प्रोडक्ट इस लिक्विडिटी और ट्रैकिंग एरर को कैसे मैनेज करते हैं। विनिर्माण (Manufacturing), रक्षा (Defense) और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) जैसे क्षेत्रों में थीमैटिक (Thematic) अवसर पैसिव प्रोडक्ट्स के माध्यम से अधिक सुलभ हो रहे हैं, लेकिन मुख्य फोकस अंतर्निहित कंपनियों की स्थिरता पर बना रहना चाहिए। जैसे-जैसे बाजार परिपक्व होगा, निवेशकों के लिए यह मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होगा कि ये व्यापक इंडेक्स विविधीकरण (Diversification) और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) को कैसे संतुलित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.