भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक खास रेंज में कारोबार देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की घबराहट बढ़ा दी है, और इसी वजह से Nifty 50 इंडेक्स 24,000 के अहम सपोर्ट लेवल पर टिका हुआ है। वहीं, Bank Nifty में 58,000 के आसपास बिकवाली का दबाव बना हुआ है। निवेशक इन लेवल्स पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) भी संकेत दे रही है कि पार्टिसिपेंट्स अभी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
Nifty 50: 24,000 का सपोर्ट कितना मजबूत?
16 जुलाई को Nifty 50 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ और 24,073 के स्तर पर रहा। ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए, 24,000 का लेवल एक बड़ा साइकोलॉजिकल सपोर्ट (Psychological Support) बन गया है। यह लेवल इसलिए भी अहम है क्योंकि यह 20-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (Exponential Moving Average) 24,039 के करीब है, जो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड की मजबूती का एक आम पैमाना है। बाजार के आंकड़े बताते हैं कि जब तक इंडेक्स इस सपोर्ट को बनाए रखता है, तब तक बाजार की ओवरऑल स्ट्रक्चर स्थिर दिख रही है। हालांकि, 24,200 से 24,300 का ज़ोन अभी भी बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है, जो किसी भी संभावित तेजी के लिए एक बड़ी रुकावट साबित हो रहा है। अगर इंडेक्स 24,000 के नीचे फिसलता है, तो और प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) देखने को मिल सकती है, और अगला सपोर्ट एरिया 23,800 के करीब हो सकता है।
Bank Nifty पर बिकवाली का दबाव
Bank Nifty पर ज़्यादा दबाव देखने को मिला, जो 176 अंकों की गिरावट के साथ 57,582 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स फिलहाल कंसॉलिडेशन (Consolidation) फेज में फंसा हुआ है और ऊपर की ओर जाने के लिए 58,300 के ऊपर एक निर्णायक क्लोजिंग की ज़रूरत है। इसके बिना, यह इंडेक्स अपनी मौजूदा रेंज में ही अटक सकता है। 57,300 से 57,400 का ज़ोन अहम सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। डेरिवेटिव डेटा (Derivative Data) से पता चलता है कि 58,000 और 58,500 के स्ट्राइक्स पर कॉल राइटर्स (Call Writers) ने बड़े पोजीशन बना लिए हैं, जिससे ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित हो गई है। वहीं, 57,000 और 57,500 पर पुट एक्टिविटी (Put Activity) इंडेक्स को कुछ सहारा दे रही है।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 16 जुलाई को मार्केट की चौड़ाई (Market Breadth) सतर्कता भरा सेंटिमेंट दिखा रही थी। 1,673 शेयर बिकवाली के दबाव में थे, जबकि केवल 1,307 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। यह असंतुलन बताता है कि निवेशक फिलहाल रिस्क लेने से बच रहे हैं और नई पोजीशन लेने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं। मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति (Geopolitical Situation) एक ऐसा अहम फैक्टर है जो शॉर्ट-टर्म में बाजार के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। निवेशक और ट्रेडर्स मौजूदा रेजिस्टेंस ज़ोन (Resistance Zones) के ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट या सपोर्ट लेवल को होल्ड करने में इंडेक्स की विफलता पर नज़र रखेंगे, ताकि अगले बड़े मूव की दिशा तय हो सके।
