Nifty 50 और Bank Nifty में गिरावट जारी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nifty 50 और Bank Nifty में गिरावट जारी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार में आज फिर नरमी का माहौल रहा। Nifty 50 इंडेक्स **0.12%** गिरकर **24,366** पर बंद हुआ, जबकि Bank Nifty भी **0.25%** की गिरावट के साथ **57,491** पर आ गया। लगातार चार दिनों की गिरावट से निवेशक सतर्क हैं।

बाजार में दिखी सुस्ती, Nifty 50 चार दिन से लुढ़का

भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मिलेजुले लेकिन सतर्क रुख के साथ कारोबार समेटा। Nifty 50 इंडेक्स 0.12% की गिरावट के साथ 24,366 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा सत्र रहा जब बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे इंडेक्स 3 अगस्त को अपने उच्चतम स्तर 24,774 से अब तक 408 अंक नीचे आ चुका है।

Bank Nifty में भी गिरावट जारी रही और यह 0.25% लुढ़ककर 57,491.10 पर बंद हुआ।

गिरावट की मुख्य वजहें?

घरेलू बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ी तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें $87 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। बढ़ती ऊर्जा लागत का सीधा असर महंगाई, रुपये की स्थिरता और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर पड़ सकता है।

आगे क्या है बाजार की चाल?

तकनीकी चार्ट्स (Technical Charts) के अनुसार, बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन (Consolidation) के दौर से गुजर रहा है। Nifty 50 के लिए 24,200 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट (Support) का काम कर रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर को तोड़ने में नाकाम रहता है, तो इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, 24,500 के स्तर पर इमीडिएट रेजिस्टेंस (Resistance) है। RSI और MACD जैसे इंडिकेटर्स भी फिलहाल बियरिश (Bearish) संकेत दे रहे हैं, जो बिकवाली के दबाव को दर्शाते हैं।

Bank Nifty के लिए 57,100 का स्तर बेहद अहम है। यह लेवल 24 जुलाई से 3 अगस्त तक की तेजी के 50% Fibonacci retracement के करीब है। इस स्तर से नीचे का मजबूत क्लोजिंग सेंटीमेंट में बदलाव का संकेत दे सकता है। ऊपर की ओर, 57,900-58,000 का जोन रेजिस्टेंस का काम करेगा।

हालांकि, इंडिया VIX (India VIX) 11.30 पर आ गया है, जो बाजार के डर में कमी का संकेत देता है। लेकिन, कम अस्थिरता (Volatility) कभी-कभी बड़े मूव से पहले की स्थिति हो सकती है। निवेशक अब फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली पर भी पैनी नजर रखे हुए हैं, जो हाल के दिनों में बाजार पर दबाव का कारण बनी है। आने वाले सत्रों में इंडेक्स अपने सपोर्ट लेवल को बनाए रख पाते हैं या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.