सेंसेक्स की तरह ही, Nifty 50 इंडेक्स ने भी 7 जुलाई 2026 को **0.66%** की बढ़त के साथ **24,430** पर क्लोजिंग दी। बाजार की नजरें अब **24,600** के अहम रेजिस्टेंस लेवल पर टिकी हैं।
Nifty 50 की दमदार क्लोजिंग, पर चिंताएं बरकरार
7 जुलाई 2026 को शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहा। Nifty 50 इंडेक्स ने 0.66% की उछाल के साथ 24,430 के स्तर पर दिन का कारोबार खत्म किया। मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या इंडेक्स इस तेजी को बरकरार रखते हुए 24,600 के लेवल को पार कर पाएगा, जो कि एक अहम रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है।
टेक्निकल सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, 24,000 का लेवल एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बनता दिख रहा है, क्योंकि यहां पुट ओपन इंटरेस्ट (put open interest) काफी ज्यादा है। अगर इंडेक्स में गिरावट आती है, तो 24,200 से 24,300 की रेंज में सपोर्ट देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, 24,600 का लेवल फिलहाल सबसे बड़ा शॉर्ट-टर्म रेजिस्टेंस साबित हो रहा है। हालांकि, 24,200 के ऊपर वीकली क्लोजिंग ने मीडियम-टर्म के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है, लेकिन निवेशक मौजूदा ऊंचाई पर प्रॉफिट-बुकिंग को लेकर सतर्क हैं।
Bank Nifty की चाल और मार्केट ब्रेड्थ
Nifty 50 के साथ-साथ Bank Nifty इंडेक्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। यह 0.61% बढ़कर 58,292 पर बंद हुआ। फिलहाल, यह इंडेक्स 58,700 से 58,800 के रेजिस्टेंस जोन में फंसा हुआ है। इस रेंज से ऊपर निकलने पर और तेजी आ सकती है, जबकि 57,800 का लेवल इमीडिएट सपोर्ट का काम कर रहा है। बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने हालिया तेजी में अहम भूमिका निभाई है और इनमें शॉर्ट कवरिंग (short covering) के संकेत मिले हैं।
चिंता का विषय: मार्केट ब्रेड्थ
इंडस्ट्री के हैवीवेट्स (heavyweights) के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, ब्रॉडर मार्केट का सेंटिमेंट (broader market sentiment) मिला-जुला नजर आ रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर मार्केट ब्रेड्थ नेगेटिव रही, जिसका मतलब है कि आज गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से ज्यादा थी। यह एक चिंता की बात है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भले ही बड़े इंडेक्स में तेजी दिख रही है, लेकिन कई स्मॉल और मिड-कैप स्टॉक्स इस रैली में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के आंकड़ों से पता चलता है कि उन्होंने इंडेक्स में शॉर्ट पोजीशन कम की है, जो अक्सर शॉर्ट कवरिंग का संकेत होता है। निवेशकों को इस पर नजर रखनी होगी कि क्या यह मोमेंटम (momentum) और ज्यादा स्टॉक्स तक फैलता है या यह तेजी कुछ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित रहती है।
