ई-कॉमर्स के बढ़ते चलन के साथ लिथियम बैटरी की अवैध शिपिंग एक बड़ा खतरा बन गई है। एयर कार्गो की **81%** सुरक्षा घटनाओं के लिए यही जिम्मेदार हैं। अब 2026 के सख्त नियमों के चलते लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर अनुपालन (Compliance) का भारी बोझ पड़ेगा।
ग्लोबल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर इन दिनों जबरदस्त ऑपरेशनल दबाव है। ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में लिथियम-आयन बैटरी का ट्रांसपोर्टेशन तो बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही हवाई और समुद्री जहाजों में आग लगने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़े डराने वाले हैं। हवाई कार्गो में होने वाली कुल सुरक्षा घटनाओं में से 81% का संबंध गलत तरीके से या बिना घोषित की गई खतरनाक वस्तुओं से है। साल 2021 से 2025 के बीच लिथियम बैटरी से जुड़ी घटनाओं में 40% का उछाल आया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि समुद्री मार्ग पर औसतन हर 17 दिन में एक बड़े कंटेनर जहाज में आग लगने की घटना हो रही है, जिसके पीछे अक्सर गलत तरीके से घोषित कार्गो होता है।
2026 के नए नियम और कंपनियों की राह
इन खतरों को कम करने के लिए साल 2026 से सख्त शिपिंग गाइडलाइन्स लागू की गई हैं। अब कंपनियों को सिर्फ लेबल बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्कैनिंग टेक्नोलॉजी, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और शिपमेंट वेरिफिकेशन पर भारी निवेश करना होगा। ई-कॉमर्स सप्लाई चेन में यह चुनौती और भी बड़ी है, क्योंकि छोटे सेलर्स अक्सर बिना प्रोफेशनल लॉजिस्टिक सपोर्ट के सामान भेजते हैं, जिससे नियमों का पालन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
निवेशकों को इन तीन बड़े बदलावों पर नजर रखनी चाहिए:
- ऑपरेशनल कॉस्ट: सख्त इंस्पेक्शन के चलते कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर मुनाफे (Margins) पर पड़ सकता है।
- बीमा का बोझ: आग की घटनाओं के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम लगातार बढ़ रहे हैं, जो शिपिंग कंपनियों के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय भार है।
- सप्लाई चेन बॉटलनेक्स: नए मानकों पर खरा न उतरने वाले शिपमेंट को जब्त किया जा सकता है, जिससे डिलीवरी की गति प्रभावित हो सकती है।
आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि लॉजिस्टिक्स कंपनियां अपनी सर्विस की रफ्तार से समझौता किए बिना इन सुरक्षा प्रोटोकॉल को कैसे लागू करती हैं।
