IPO का जलवा जारी! मार्च की गिरावट के बावजूद, इस साल लिस्ट हुई 2/3 कंपनियां मुनाफे में

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AuthorNeha Patil|Published at:
IPO का जलवा जारी! मार्च की गिरावट के बावजूद, इस साल लिस्ट हुई 2/3 कंपनियां मुनाफे में

मार्च में आई बड़ी गिरावट के बावजूद, इस साल लिस्ट हुई दो-तिहाई कंपनियां अपने IPO प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रही हैं, और औसतन **26%** का मुनाफा दे रही हैं। हालांकि, स्मॉल और मिड-कैप शेयरों ने इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि कंपनी का प्रदर्शन और वैल्यूएशन ही सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कुछ हालिया लिस्टिंग को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है।

मार्च की उथल-पुथल का IPO पर असर?

मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी मुश्किल रहा, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स बेंचमार्क 11% से ज्यादा गिरे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यह गिरावट आई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बड़े बाजार सुधार का हाल ही में लिस्ट हुई कंपनियों की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ा है।

IPOs का शानदार प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक पब्लिक हुई 29 में से 21 कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार कर रही हैं। इन सफल IPOs ने लिस्टिंग के बाद से औसतन 30% का रिटर्न दिया है। Omnitech Engineering इस दौड़ में सबसे आगे रही, जिसने 5 मार्च को लिस्टिंग के बाद से अपने IPO प्राइस पर 147.5% की बढ़ोतरी दर्ज की है। Sedemac Mechatronics और OnEMI Technology Solutions जैसी अन्य मजबूत कंपनियों ने भी क्रमशः 94% और 87.8% का मुनाफा कमाया है।

नई लिस्टिंग के सामने चुनौतियां

हालांकि, हर कंपनी के लिए यह कहानी इतनी अच्छी नहीं रही है। कई हालिया लिस्टिंग अपने शुरुआती वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। Shree Ram Twistex ने अपने इश्यू प्राइस से 60.3% की गिरावट देखी है। Innovision और Amir Chand Jagdish Kumar के शेयरों में भी क्रमशः 44% और 19.5% की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि बाजार के रुझान सभी नई कंपनियों को समान रूप से प्रभावित नहीं करते हैं। कंपनी के बिजनेस मॉडल, उसके सेक्टर की हेल्थ और शुरुआती प्राइसिंग जैसे कारक इन अलग-अलग नतीजों के मुख्य कारण हैं।

बाजार का आउटलुक और IPO पाइपलाइन

नई लिस्टिंग में देखी गई यह मजबूती काफी हद तक स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट के प्रदर्शन का नतीजा है, जिसने इस दौरान लार्ज-कैप इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, सेक्टर-विशिष्ट दबाव अभी भी मौजूद हैं। आईटी, केमिकल्स और सोलर जैसे उद्योगों में कुछ कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां देखी गई हैं, जो बताती हैं कि निवेशकों को सिर्फ हालिया लिस्टिंग के उत्साह पर निर्भर रहने के बजाय हर बिजनेस का उसके अनूठे प्रतिस्पर्धी स्थिति के आधार पर मूल्यांकन करना चाहिए।

आगे देखते हुए, IPO बाजार सक्रिय बना हुआ है। ₹9,813 करोड़ के SBI Funds Management का इश्यू 14 जुलाई को खुलने वाला है। इसके अलावा, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी बड़ी कंपनियों के इश्यू भी पाइपलाइन में हैं, जो जरूरी नियामक मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाला कैलेंडर भले ही व्यस्त हो, लेकिन जारीकर्ता (issuers) शायद सतर्क रहेंगे और अपने पब्लिक ऑफरिंग की लॉन्च डेट फाइनल करने से पहले बाजार की स्थिरता पर करीब से नजर रखेंगे। निवेशकों के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि वे नई IPO वैल्यूएशन की तुलना स्थापित उद्योग के साथियों से करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे हालिया मार्केट में प्रवेश करने वालों के लिए ज्यादा भुगतान न करें।

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