New ITR Rules: ITR-1 हुआ आसान, ITR-2 फाइल करने वालों पर बढ़ी नज़र

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AuthorMehul Desai|Published at:
New ITR Rules: ITR-1 हुआ आसान, ITR-2 फाइल करने वालों पर बढ़ी नज़र

CBDT ने ITR-1 को सरल बनाया है ताकि ज़्यादा रिटेल निवेशक कैपिटल गेन्स और कई प्रॉपर्टीज़ की जानकारी दे सकें। वहीं, ITR-2 फाइल करने वालों के लिए विदेशी संपत्ति और वर्चुअल डिजिटल संपत्ति को लेकर कड़े खुलासे (disclosure) की ज़रूरत होगी।

आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीज़न शुरू हो चुका है, और इस साल असेसमेंट ईयर के लिए फाइलिंग फॉर्म्स में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने ज़्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस का बोझ कम करने पर ध्यान दिया है, वहीं ज़्यादा जटिल वित्तीय प्रोफाइल वालों के लिए ज़रूरी डिटेल्स को बढ़ाया है।

ITR-1 में आम निवेशकों को बड़ी राहत

फॉर्म ITR-1, जिसे 'सहज' के नाम से भी जाना जाता है, भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला टैक्स फॉर्म है, जिसे 5.25 करोड़ से ज़्यादा टैक्सपेयर्स भरते हैं। नए बदलावों से यह फॉर्म अब ज़्यादा लोगों के लिए उपयोगी होगा। अब, सैलरीड इंडिविजुअल्स जो लिस्टेड स्टॉक्स से ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कमाते हैं, वे ITR-1 का उपयोग कर सकते हैं। पहले, स्टॉक मार्केट से छोटे-मोटे मुनाफे पर भी ज़्यादा मुश्किल ITR-2 भरना पड़ता था। इसके अलावा, हाउस प्रॉपर्टीज़ से होने वाली आय की रिपोर्टिंग की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे दो प्रॉपर्टीज़ तक रखने वाले टैक्सपेयर्स इस सरल फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑटोमेटेड डेटा से फाइलिंग होगी आसान

टैक्सपेयर्स की मदद के लिए, इनकम टैक्स पोर्टल ने प्री-फिलिंग (pre-filling) क्षमताओं को बेहतर बनाया है। सैलरी, बैंक इंटरेस्ट, डिविडेंड और ब्रोकर्स द्वारा रिपोर्ट किए गए कैपिटल गेन्स जैसी जानकारी अब फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) से ऑटोमैटिकली भर जाएगी। इससे मैन्युअल डेटा एंट्री की ज़रूरत कम हो गई है। साथ ही, डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2024 और उसके बाद के लिए 'डिस्कार्ड रिटर्न' (discard return) का विकल्प भी पेश किया है। इससे अगर टैक्सपेयर को वेरिफिकेशन से पहले अपनी फाइलिंग में कोई गलती मिलती है, तो वे सबमिट किए गए रिटर्न को डिलीट करके नया फाइल कर सकते हैं, जो कि रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की पारंपरिक प्रक्रिया से ज़्यादा तेज़ है। रिफंड की टाइमलाइन में भी सुधार हुआ है, ITR-1 फाइल करने वाले अब ई-वेरिफिकेशन के तीन हफ्तों के अंदर अपना रिफंड पा सकते हैं।

ITR-2 के लिए बढ़ी रिपोर्टिंग की ज़रूरत

जबकि ITR-1 को सरल बनाया गया है, ITR-2 ज़्यादा जटिल आय वाले टैक्सपेयर्स के लिए ज़्यादा कड़ा हो गया है। विदेशी संपत्ति (foreign assets) के लिए खुलासे की ज़रूरतें, जो शेड्यूल FA के तहत आती हैं, अब ज़्यादा विस्तृत हैं। इनमें ऑफशोर म्यूचुअल फंड्स, विदेशी बैंक अकाउंट्स और विदेशी पैरेंट कंपनियों से मिलने वाले ग्रांट्स जैसी जानकारी शामिल है। इनकी सही रिपोर्टिंग न करने पर 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत भारी पेनाल्टी लग सकती है।

इसी तरह, शेड्यूल VDA के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) की रिपोर्टिंग में हर ट्रांज़ैक्शन का लाइन-बाय-लाइन डिटेल देना होगा। क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर अभी भी 30% का फ्लैट टैक्स है, और दूसरे आय स्रोतों के साथ नुकसान को एडजस्ट करने या उसे आगे ले जाने की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा, शेड्यूल AL में संपत्ति और देनदारी की घोषणा, जो ₹50 लाख से ज़्यादा आय वाले व्यक्तियों के लिए अनिवार्य है, अब ज़्यादा टैक्सपेयर्स को कवर कर रही है। विदेशी रिटायरमेंट अकाउंट्स रखने वाले व्यक्तियों को अब ITR-1 के बजाय ITR-2 चुनना होगा, जो इंटरनेशनल टैक्स कंप्लायंस पर टैक्स डिपार्टमेंट के फोकस को दर्शाता है। निवेशकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके रिकॉर्ड AIS डेटा से मेल खाते हों, ताकि टैक्स डिपार्टमेंट से मिसमैच नोटिस से बचा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.