F&O ट्रेडर्स के लिए नए ITR नियम: टर्नओवर की जानकारी देना अब ज़रूरी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
F&O ट्रेडर्स के लिए नए ITR नियम: टर्नओवर की जानकारी देना अब ज़रूरी!

एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स फॉर्म में F&O ट्रेडर्स को अब अपने ट्रेडिंग टर्नओवर, मुनाफे (Profits) और नुकसान (Losses) का अलग से खुलासा करना होगा। इन बदलावों से डेरिवेटिव (Derivative) से होने वाली आमदनी को रिपोर्ट करने का तरीका साफ हो गया है। फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 अगस्त या 31 अक्टूबर होगी, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रेडर के बिजनेस इनकम के लिए टैक्स ऑडिट की ज़रूरत है या नहीं।

एसेसमेंट ईयर 2026-27 से, सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स के लिए रिपोर्टिंग की ज़रूरतों को और सख्त बना दिया है। अब टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स फाइलिंग में F&O टर्नओवर और उससे हुए फायदे या नुकसान का खास ब्योरा देना होगा। यह अपडेट डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स से होने वाली आमदनी में ज़्यादा पारदर्शिता लाने के लिए है।

F&O टर्नओवर की गणना कैसे करें?

टैक्स के लिहाज़ से टर्नओवर की गणना थोड़ी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि इनकम-टैक्स एक्ट में इसका कोई एक तय फॉर्मूला नहीं बताया गया है। इससे निपटने के लिए, कई टैक्सपेयर्स इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की गाइडलाइन्स का सहारा लेते हैं। इस फ्रेमवर्क के तहत, टर्नओवर की गणना आम तौर पर ट्रेडों से हुए फायदे और नुकसान, दोनों के कुल एब्सोल्यूट वैल्यू (Absolute Value) को जोड़कर की जाती है।

उदाहरण के लिए, अगर एक ट्रेडर ने एक ट्रेड पर मुनाफा कमाया और दूसरे पर नुकसान उठाया, तो कुल टर्नओवर वॉल्यूम निकालने के लिए दोनों फिगर को पॉजिटिव मानकर जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, ऑप्शंस की बिक्री से मिले प्रीमियम (Premium) को भी इस गणना में शामिल किया जाता है, जब तक कि वे पहले से ही नेट प्रॉफिट (Net Profit) में शामिल न हों। यह ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के अंत में खुली पोजीशन (Open Positions) को तब तक टर्नओवर नहीं गिना जाता, जब तक कि वे पोजीशन क्लोज न हो जाएं।

बिजनेस इनकम और फाइलिंग की डेडलाइन्स

टैक्स के उद्देश्यों के लिए, F&O ट्रेडिंग से होने वाली आमदनी को नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम (Non-speculative Business Income) के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। इस क्लासिफिकेशन का सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि कोई व्यक्ति अपना टैक्स कैसे फाइल करता है और उन्हें कब तक फाइल करना होता है।

अगर किसी ट्रेडर का बिजनेस टर्नओवर उस तय सीमा से ज़्यादा हो जाता है जिसके लिए टैक्स ऑडिट ज़रूरी है, तो फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर होती है। वहीं, जिन ट्रेडर्स की ट्रेडिंग एक्टिविटी टैक्स ऑडिट की ज़रूरत को पूरा नहीं करती, उनके लिए स्टैंडर्ड डेडलाइन 31 अगस्त ही रहेगी। इन्वेस्टर्स को यह जानना ज़रूरी है कि इन फाइलिंग्स की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि डेडलाइन चूकने से भविष्य के सालों में बिजनेस लॉस (Business Loss) को कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे कुल टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। इन नए डिस्क्लोजर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए साल भर के सभी ट्रेड लॉग्स और प्रॉफिट-लॉस स्टेटमेंट का सही डॉक्यूमेंटेशन अब पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.