ITR Forms AY 2026-27: अब प्राइमरी के साथ सेकेंडरी एड्रेस भी देना होगा, HRA क्लेम पर हो सकती है जांच!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ITR Forms AY 2026-27: अब प्राइमरी के साथ सेकेंडरी एड्रेस भी देना होगा, HRA क्लेम पर हो सकती है जांच!

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स में बड़ा बदलाव किया है। अब टैक्सपेयर्स को अपना प्राइमरी एड्रेस के साथ-साथ सेकेंडरी एड्रेस भी बताना होगा।

ITR फॉर्म्स में आया नया नियम

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स में एक अहम बदलाव किया है। अब टैक्सपेयर्स को अपने ITR फाइलिंग में प्राइमरी एड्रेस के साथ-साथ सेकेंडरी एड्रेस भी देना अनिवार्य होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि विभाग के पास टैक्सपेयर्स का संपर्क विवरण (Contact Details) हमेशा सटीक बना रहे।

HRA क्लेम करने वालों के लिए खास

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नए नियम से खासकर उन लोगों को ध्यान देना होगा जो हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का क्लेम करते हैं। अब उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ITR फॉर्म में दर्ज पता और उनके किराए के सबूत (जैसे रेंट एग्रीमेंट, रसीदें) में दी गई जानकारी एक जैसी हो। अगर आप किराए के मकान को प्राइमरी एड्रेस के तौर पर दिखाते हैं, तो आपको संबंधित दस्तावेज तैयार रखने होंगे।

क्यों जरूरी है सटीक जानकारी?

हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने यह साफ नहीं किया है कि यह बदलाव सिर्फ HRA की जांच के लिए है, लेकिन इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। अगर आपके ITR में दर्ज पते और आपके एम्प्लॉयर द्वारा दी गई जानकारी या किराए के दस्तावेज़ों में अंतर पाया जाता है, तो आपका रिटर्न जांच के दायरे में आ सकता है। ऐसे में आपको विभाग से सवाल-जवाब या अतिरिक्त प्रूफ देने पड़ सकते हैं।

गलत पते से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

आयकर विभाग का कहना है कि पते की गलत या अधूरी जानकारी से रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है। अगर विभाग को आपके प्राइमरी या सेकेंडरी एड्रेस की जानकारी में विसंगति मिलती है, तो यह एक औपचारिक समीक्षा (Formal Review) को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए, सलाह दी जाती है कि ITR फाइल करने से पहले अपने किराए के दस्तावेजों को अच्छी तरह जांच लें और सुनिश्चित करें कि सारी डिटेल्स आपके ITR फॉर्म से मेल खाती हों। सटीक जानकारी देना ही सबसे अच्छा तरीका है ताकि आप इनकम टैक्स विभाग की अतिरिक्त पूछताछ से बच सकें और आपका रिफंड प्रोसेस आसानी से हो।

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